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Pakistan: महरंग बलोच के उम्रकैद पर सिंध बार काउंसिल का विरोध, उठाए न्याय प्रक्रिया पर सवाल

Wed, 24 Jun 2026 03:42 PM IST
Asmita Tripathi आईएएनएस, इस्लामाबाद

सार

पाकिस्तान की सिंध बार काउंसिल ने महरंग बलोच समेत चार कार्यकर्ताओं को दी गई उम्रकैद की सजा की आलोचना की है। काउंसिल ने कहा कि असहमति अपराध नहीं है और न्यायिक प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए। 

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बलोच कार्यकर्ताओं के उम्रकैद के फैसले पर सिंध बार काउंसिल का विरोध - फोटो : आईएएनएस
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विस्तार
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पाकिस्तान की सिंध बार काउंसिल ने बलोच कार्यकर्ताओं को दी गई आजीवन कारावास सजा की कड़ी आलोचना की है। बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) की नेता महरंग बलोच को भी उम्र कैद की सजा दी गई है। वकीलों ने कहा कि अगर यह फैसला निष्पक्षता, स्वतंत्र न्याय प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के बिना दिया गया है, तो यह चिंता का विषय है। 

पाकिस्तानी एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने सोमवार को चार कार्यकर्ताओं को एक फ्रंटियर कॉर्प्स अधिकारी की हत्या से जुड़े मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। महरंग बलोच के साथ-साथ बलोच स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (बीएसओ) के अध्यक्ष बलाच कादिर, केंद्रीय नेता अबू बकर कलांची और बीवाईसी नेता सिबघतुल्लाह शाजी को भी आजीवन कारावास की सजा दी गई।

'किसी भी तरह की सहमति थोपना नहीं है'

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बयान में सदस्यों ने कहा कि कानून की गरिमा उसकी सख्त सजा में नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता में निहित होती है। उन्होंने कहा, 'अदालतों का उद्देश्य किसी भी तरह की सहमति थोपना नहीं है, बल्कि स्वतंत्रता की रक्षा करना, मनमानी को रोकना और मानव गरिमा को बनाए रखना है। अगर न्यायिक संस्थानों को स्वतंत्रता की रक्षा करने के बजाय असहमति को दबाने का माध्यम माना जाने लगे, तो इससे संविधान की आत्मा को ठेस पहुंचती है। इसके साथ ही न्याय व्यवस्था में जनता का भरोसा कमजोर होता है।'

असहमति कोई अपराध नहीं
बयान में आगे कहा गया, 'असहमति कोई अपराध नहीं है और शांतिपूर्ण ढंग से नागरिक अधिकारों की मांग करना देशद्रोह नहीं माना जा सकता। किसी भी व्यक्ति को अपने अधिकारों, न्याय और हाशिए पर मौजूद लोगों की आवाज उठाने का हक लोकतंत्र का मूल आधार है।' सदस्यों ने यह भी कहा कि कोई भी समाज तब तक कानून के शासन का दावा नहीं कर सकता, जब तक वह विचार व्यक्त करने वालों को अपराधी बनाता है।

उन्होंने बलोच कार्यकर्ताओं पर की गई कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा कि मानवाधिकारों और संवैधानिक स्वतंत्रता के पक्ष में आवाज उठाने वालों को सजा देना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। सत्ता की कमजोरी का जिक्र करते हुए आगे कहा गया, 'शांतिपूर्ण ढंग से अधिकारों की मांग करने वाले लोग वास्तव में लोकतंत्र के सबसे मजबूत रक्षक हैं। उन्हें दंडित करना सत्ता की कमजोरी को दर्शाता है।'

 

 

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