फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pakistan: 'शिमला समझौता अभी खत्म नहीं हुआ', पाकिस्तान ने अपने रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के दावे से बनाई दूरी

Fri, 06 Jun 2025 06:47 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने भले ही शिमला समझौते को मृत दस्तावेज कहा हो, लेकिन पाकिस्तान की आधिकारिक विदेश नीति अभी भी इस समझौते को मान्यता देती है। ऐसे में यह स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान सरकार खुद अपने मंत्री के बयान से सहमत नहीं है और दोनों देशों के बीच तनाव के बावजूद द्विपक्षीय समझौतों को तोड़ने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।
विज्ञापन
ख्वाजा आसिफ, रक्षा मंत्री, पाकिस्तान - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पाकिस्तान ने अपने रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस बयान से किनारा कर लिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि 1972 का शिमला समझौता अब एक मृत दस्तावेज बन चुका है। अब पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत के साथ किसी भी द्विपक्षीय समझौते को रद्द करने का कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया है। मामले में पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि, 'हाल की घटनाओं के कारण आंतरिक चर्चा ज़रूर चल रही है, लेकिन किसी समझौते को रद्द करने जैसा कोई फैसला नहीं हुआ है। शिमला समझौता सहित सभी द्विपक्षीय समझौते फिलहाल प्रभावी हैं।'
विज्ञापन


पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का विवादास्पद बयान
5 जून को एक टीवी इंटरव्यू में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि, 'भारत की एकतरफा कार्रवाइयों, खासतौर पर 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद, शिमला समझौता अब अप्रासंगिक हो गया है। यह अब एक मृत दस्तावेज है। हम 1948 की स्थिति पर लौट आए हैं, जब संयुक्त राष्ट्र ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) को संघर्षविराम रेखा घोषित किया था।'

आसिफ ने आगे यह भी कहा कि, 'सिंधु जल संधि का क्या होगा, वो अलग मुद्दा है, लेकिन शिमला समझौता तो पहले ही खत्म हो चुका है। अब भारत और पाकिस्तान के बीच विवादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाना होगा क्योंकि द्विपक्षीय बातचीत का ढांचा टूट चुका है।'
विज्ञापन


यह भी पढ़ें - PM Modi: जी-7 सम्मेलन में हिस्सा लेने कनाडा जाएंगे पीएम मोदी, कनाडा के प्रधानमंत्री ने फोन कर दिया न्योता

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने दी सफाई
हालांकि, उनके इस बयान के बाद तुरंत ही पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यह मंत्री का व्यक्तिगत नजरिया हो सकता है, सरकारी नीति नहीं। इस बयान ने पाकिस्तान में भी हलचल मचा दी थी, और कई विश्लेषकों ने इसे बिना सोचे-समझे बोल देने वाला बयान कहा है।

क्या है शिमला समझौता?
1972 में भारत-पाक युद्ध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के ज़ुल्फिकार अली भुट्टो के बीच शिमला समझौता हुआ था। इस समझौते के मुख्य बिंदु थे। जिसमें सभी विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से, द्विपक्षीय बातचीत के जरिये सुलझाया जाएगा।  किसी तीसरे पक्ष को नहीं जोड़ा जाएगा (यानी न संयुक्त राष्ट्र और न कोई अन्य देश)। जबकि नियंत्रण रेखा (एलओसी) को एक अंतरिम सीमा के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें - Shashi Tharoor: 'इस पद का कोई व्यावहारिक परिणाम नहीं', UNSC में पाकिस्तान को जिम्मेदारी मिलने पर बोले थरूर

हालिया तनाव और भारत की प्रतिक्रिया
पिछले महीने, 7 मई को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था, जिसमें कई भारतीय नागरिक मारे गए। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर हमला किया। इसके बाद पाकिस्तान ने 8 से 10 मई के बीच भारतीय सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले की कोशिश की, लेकिन भारत ने भी सख्ती से जवाब दिया। आखिरकार 10 मई को दोनों देशों के सेना संचालन महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच बातचीत के बाद तनाव में कुछ कमी आई।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें