खालिस्तानी आतंकी नेटवर्क और पाकिस्तान के साथ उसके संबंधों को लेकर कनाडाई पत्रकार व शोधकर्ता टेरी मिलवस्की की रिपोर्ट पर एक सिख संगठन ने अपना विरोध जताया है। खालिस्तान समर्थक इस संगठन ने एक पत्र जारी किया है, जिसमें मिलवस्की की रिपोर्ट को खारिज करते हुए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का समर्थन किया गया है।
यह पत्र मिलवस्की की रिपोर्ट प्रकाशित करने वाले मैकडोनाल्ड-लॉरियर इंस्टीट्यूट के प्रबंधक बोर्ड को संबोधित करते हुए लिखा गया है। इस पत्र पर 54 लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। पत्र में खालिस्तान समर्थक संगठन ने उस तरीके पर चिंता जताई है, जिसके जरिये रिपोर्ट में वैध तरीके से प्रयास कर रहे नस्लीय समुदाय के खिलाफ व्यापक आक्षेप जाहिर कर रही है।
हालांकि रिपोर्ट के लेखक के तौर पर मिलवस्की ने इस मुददे को उठाया है कि यह पत्र लेख के खिलाफ किए गए दावों के सबूत के तौर पर एक भी कथन पेश करने में विफल रहा है। मिलवस्की ने ट्वीट में कहा, इस लेख को कूड़ा बताने वाले सिख शिक्षाविदों का एक पत्र अपने दावों के पक्ष में एक भी कथन पेश करने में फेल हो गया है।
वे उस बात को लेकर हमला बोल रहे हैं, जो लेख में नहीं कही गई। लेकिन इस मुद्ïदे पर विवाद नहीं है कि पाकिस्तान खालिस्तान आंदोलन का समर्थन करता है। इसके लिए धन्यवाद। रिपोर्ट के मुताबिक, इस पत्र का मसौदा कैलगरी विश्वविद्यालय के धर्म व साहित्य विभाग में सिख अध्ययन के इंस्ट्रक्टर हरजीत सिंह ग्रेवाल ने तैयार किया। कथित तौर पर हरजीत ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद से अन्य लोगों का साथ हासिल किया है।
पत्र पर अलगाववादी विचारों वाले हफ्सा कंजवाल के भी हस्ताक्षर हैं, जो पाकिस्तानी दूतावास के भारत विरोधी अभियानों में योगदान देता रहता है और जम्मू-कश्मीर पर भारत के खिलाफ बयान देता है। इसके अलावा वैंकूवर स्थित पाकिस्तानी दूतावास में नियमित आने जाने वाले इंद्र प्रहस्त के भी इस पर हस्ताक्षर मौजूद हैं।
बता दें कि जिस वेबसाइट पत्र अपलोड किया गया है, वह वेबसाइट 15 सितंबर को ही पंजीकृत कराई गई थी। उसी दिन यह पत्र अपलोड किया गया था। वेबसाइट में केवल एक वेब पेज है और उसमें मुख्य पृष्ठï पर प्रकाशित पत्र को छोडक़र अन्य कोई सामग्री, लिंक या वेब पेज मौजूद नहीं है।