दुनिया भर में फैल रहे आर्थिक संकट के शुरुआती लक्षण अब बांग्लादेश में भी नजर आने लगे हैं। यहां बैंकों में बचत खातों में जमा कराई जाने वाली रकम में भारी गिरावट आई है। इससे बैंकों के सामने नकदी की समस्या खड़ी हो गई है। विश्लेषकों के मुताबिक जिस समय सरकार और निजी क्षेत्र को नकदी की सबसे ज्यादा जरूरत है, ये समस्या अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन कर आई है।
बांग्लादेश बैंक ने अपनी रिपोर्ट में स्वीकार किया है कि बैंकों के कर्ज देने और उनमें जमा होने वाली रकम के बीच टूट रहे संतुलन से कारोबार जगत को नकदी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। बचत खातों में रकम जमा कराने की दर में बीते अप्रैल में भारी गिरावट आई। अप्रैल 2021 में बैंकों में बचत वृद्धि दर 13 फीसदी रही थी, जबकि साल भर बाद ये सिर्फ 8.6 फीसदी रह गई।
बांग्लादेश बैंक ने इस बात का जिक्र किया है कि बचत दर में जहां गिरावट आ रही है, वहीं कर्ज लेने की दर में वृद्धि जारी है। इससे बैंकों की नकदी उपलब्ध कराने की क्षमता प्रभावित हो रही है। नकदी की उपलब्धता घटने के कारण कर्ज, ट्रेजरी बिल, और बॉन्ड्स पर ब्याज दरें बढ़ी हैं। ट्रेजरी बिल और बॉन्ड पर ब्याज दर इस महीने 8 से 10 प्रतिशत तक पहुंच गईं, जबकि कुछ महीने पहले ये चार फीसदी से भी कम थी। ट्रेजरी बिल और बॉन्ड पर अधिक ब्याज चुकाने का असर राजकोष पर पड़ेगा।
बांग्लादेश में मई में मुद्रास्फीति दर आठ साल के सबसे ऊंचे स्तर यानी 7.42 फीसदी पर पहुंच गई। इस महीने बैंकों में जमा राशि पर मिलने वाली ब्याज की दर पांच फीसदी से नीचे थी। इसका मतलब है कि बैंकों में पैसा रखना असल में घाटे का सौदा बन गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक महंगाई दर और बचत पर ब्याज दर में फासला और बढ़ने का अंदेशा है। इसलिए समझा जा रहा है कि बैंकों में बचत करने में लोगों की रुचि और घटेगी।