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नीदरलैंड से दो बड़े संकेतः अमेरिका से डील करीब, कार्बन कर पर अड़ा यूरोप; व्यापार समझौतों पर गोयल क्या बोले?

सार

नीदरलैंड से दो बड़े संकेत मिले हैं। अमेरिका और भारत की डील करीब है। यूरोप कार्बन कर वसूलने पर अड़ा हुआ है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत की आठ और देशों के साथ भी व्यापार समझौतों पर बातचीत जारी है।
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पीयूष गोयल का नीदरलैंड दौरा कई मायनों में खास रहा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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महीनों की खींचतान, शुल्कों की मार और कई दौर की बातचीत के बाद भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अब अंतिम मोड़ पर है। दोनों देशों के बीच ज्यादातर मुद्दों पर बातचीत पूरी हो चुकी है और अब समझौते की बारीकियां कसी जा रही हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को हेग में भारत-नीदरलैंड कारोबारी मंच को संबोधित करते हुए यह एलान किया। उन्होंने कहा कि भारत आठ और देशों के साथ भी व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है।

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गोयल का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस टिप्पणी के कुछ दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने भारत के साथ समझौते को लेकर उम्मीद जताई थी। 20 अक्तूबर को व्हाइट हाउस में ट्रंप ने कहा था कि भारत समझौता करना चाहता है, हम समझौता करेंगे, हम काफी करीब हैं, और यह पहले के समझौतों से बिल्कुल अलग तरह का होगा। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी कहा है कि बड़े मुद्दे सुलझ गए हैं और दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं।

  • उधर, इसी मंच परनीदरलैंड के विदेश व्यापार और विकास सहयोग मंत्री शूर्ड शूर्डस्मा ने साफ कर दिया कि यूरोप के कार्बन सीमा कर पर कोई समझौता नहीं होगा।  

कार्बन कर पर  एकमत नहीं

वैन गॉग की मिसाल पर मुस्कुराहटें साझा करने वाले भारत और नीदरलैंड कार्बन कर पर एक सुर में नहीं दिखे। मीडिया से बातचीत में डच मंत्री शूर्डस्मा ने दो टूक कहा कि यूरोप के कार्बन सीमा कर यानी सीबीएएम पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यूरोप में नियमों के अंबार पर गोयल की आलोचना को लेकर उन्होंने माना कि इस दिशा में काम हो रहा है, लेकिन जोर देकर कहा कि कुछ नियमों का बने रहना बहुत जरूरी है।

  • गोयल ने मुस्कुराते हुए कहा कि दोनों देशों ने शायद कभी इस साझेदारी की ताकत को पूरी तरह पहचाना ही नहीं, वरना भारत के किसी वाणिज्य मंत्री को यहां पहली बार आने में इतने बरस न लगते, और कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी शायद दशकों बाद आया है। उन्होंने कहा कि आज की करीब चार लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था को 2047 तक 20 लाख करोड़ डॉलर तक ले जाना 140 करोड़ भारतीयों का सामूहिक संकल्प है। उन्होंने यह भी कहा, भारत भरोसेमंद देश है, हम न डेटा चुराते हैं, न तकनीक, न विचार, और इसी भरोसे के चलते अगले कुछ वर्षों में करीब 200 अरब डॉलर के डेटा केंद्र आने का अनुमान है।  

शूर्डस्मा ने बताया कि चिप बनाने वाली मशीनों की दिग्गज डच कंपनी एएसएमएल भारत की तेजी से बढ़ती सेमीकंडक्टर मांग के लिए मशीनें देने की योजना बना रही है और एनएक्सपी के शोध केंद्र में 4,000 से ज्यादा डिजाइन इंजीनियर काम कर रहे हैं।

तरजीही बाजार तक पहुंच पर हो रहा काम

भारत-अमेरिका ने फरवरी में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण का ढांचा तय होने का एलान किया था, लेकिन अमेरिका में शुल्क की तस्वीर बदलने के बाद इस पर फिर से बातचीत करनी पड़ी। इसी महीने की शुरुआत में गोयल ने अमेरिका के मिल्वॉकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर से मुलाकात कर 7 फरवरी के संयुक्त बयान के अनुरूप अंतरिम समझौते को जल्द पूरा करने पर बात की थी। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल भी कह चुके हैं कि समझौता काफी हद तक तय हो चुका है और दोनों देश तरजीही बाजार पहुंच देने के ढांचे पर काम कर रहे हैं।

पांच साल में दुनिया से ज्यादा डिशवॉशर भारत में

गोयल ने कहा कि उनका अनुमान है कि पांच साल बाद भारत में पूरी दुनिया से ज्यादा डिशवॉशर बिकेंगे। वजह बताई कि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं कामकाज की दुनिया में आ रही हैं, वे घर पर कपड़े और बर्तन धोने में वक्त नहीं गंवाना चाहतीं, वे औपचारिक कार्यबल का हिस्सा बनना चाहती हैं। भारत में बेहतर जीवन की यही ललक लोगों में कुछ कर गुजरने की आग जगा रही है।

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