महीनों की खींचतान, शुल्कों की मार और कई दौर की बातचीत के बाद भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अब अंतिम मोड़ पर है। दोनों देशों के बीच ज्यादातर मुद्दों पर बातचीत पूरी हो चुकी है और अब समझौते की बारीकियां कसी जा रही हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को हेग में भारत-नीदरलैंड कारोबारी मंच को संबोधित करते हुए यह एलान किया। उन्होंने कहा कि भारत आठ और देशों के साथ भी व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है।
वैन गॉग की मिसाल पर मुस्कुराहटें साझा करने वाले भारत और नीदरलैंड कार्बन कर पर एक सुर में नहीं दिखे। मीडिया से बातचीत में डच मंत्री शूर्डस्मा ने दो टूक कहा कि यूरोप के कार्बन सीमा कर यानी सीबीएएम पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यूरोप में नियमों के अंबार पर गोयल की आलोचना को लेकर उन्होंने माना कि इस दिशा में काम हो रहा है, लेकिन जोर देकर कहा कि कुछ नियमों का बने रहना बहुत जरूरी है।
शूर्डस्मा ने बताया कि चिप बनाने वाली मशीनों की दिग्गज डच कंपनी एएसएमएल भारत की तेजी से बढ़ती सेमीकंडक्टर मांग के लिए मशीनें देने की योजना बना रही है और एनएक्सपी के शोध केंद्र में 4,000 से ज्यादा डिजाइन इंजीनियर काम कर रहे हैं।
भारत-अमेरिका ने फरवरी में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण का ढांचा तय होने का एलान किया था, लेकिन अमेरिका में शुल्क की तस्वीर बदलने के बाद इस पर फिर से बातचीत करनी पड़ी। इसी महीने की शुरुआत में गोयल ने अमेरिका के मिल्वॉकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर से मुलाकात कर 7 फरवरी के संयुक्त बयान के अनुरूप अंतरिम समझौते को जल्द पूरा करने पर बात की थी। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल भी कह चुके हैं कि समझौता काफी हद तक तय हो चुका है और दोनों देश तरजीही बाजार पहुंच देने के ढांचे पर काम कर रहे हैं।
गोयल ने कहा कि उनका अनुमान है कि पांच साल बाद भारत में पूरी दुनिया से ज्यादा डिशवॉशर बिकेंगे। वजह बताई कि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं कामकाज की दुनिया में आ रही हैं, वे घर पर कपड़े और बर्तन धोने में वक्त नहीं गंवाना चाहतीं, वे औपचारिक कार्यबल का हिस्सा बनना चाहती हैं। भारत में बेहतर जीवन की यही ललक लोगों में कुछ कर गुजरने की आग जगा रही है।