श्रीलंका की राजधानी कोलंबो के तट के पास गुरुवार को वह मालवाहक जहाज डूब गया जिसमें करीब एक महीने पहले आग लगी थी। जहाज पर रसायन लदा था और इसके डूबने के साथ ही पर्यावरणीय आपदा की आशंका पैदा हो गई है। जहाज में आग 20 मई को लगी थी, जब यह जहाज कोलंबो के उत्तर-पश्चिम में लगभग 9.5 समुद्री मील (18 किलोमीटर) की दूरी पर लंगर डाले हुए था और बंदरगाह में प्रवेश करने की प्रतीक्षा कर रहा था।
जहाज के संचालक ने कहा है कि सिंगापुर के ध्वज वाले एक्स-प्रेस पर्ल जहाज का मलबा अब पूरी तरह समुद्र में 21 मीटर की गहराई में तलहटी पर बैठ गया है। वहीं, इसे लेकर एक्स-प्रेस फीडर्स ने कहा कि किसी डूब चुके जहाज से किसी तरह के मलबे और तेल के बिखरने की स्थिति से निपटने के लिए एक बचाव दल घटनास्थल पर मौजूद है।
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श्रीलंका के समुद्री पर्यावरण संरक्षण प्राधिकरण की प्रमुख दर्शिनी लहन्दापुरा ने भी जहाज के डूबने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि समुद्र के अशांत होने के चलते फिलहाल जहाज के मलबे को हटाना असुरक्षित है। अभी समुद्र में ऊंची लहरें उठ रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में समुद्र के अशांत होने के चलते अभी हम इसे लेकर कुछ नहीं कर सकते हैं।
बता दें कि मानसून का मौसम पिछले महीने शुरू हुआ था और यह आमतौर पर सितंबर में समाप्त होता है। लहंदापुरा ने कहा, 'तब तक के लिए जहाज के मालिक ने एक कार्यवाहक कंपनी नियुक्त की है। पूरे क्षेत्र की देखभाल कार्यवाहक कंपनी की ओर से की जाएगी जब तक कि मालिक मलबे को हटाने के लिए किसी कंपनी की नियुक्ति नहीं करता है।'
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श्रीलंका की नौसेना का मानना है कि जहाज में रखे रसायनों के कारण आग लगी जिनमें 25 टन नाइट्रिक एसिड और अन्य रसायन शामिल थे। इस आग में अधिकतर रसायन जल गया था लेकिन ऐसी आशंका हैं कि जहाज पर बचे रसायनों और तेल के बिखरने से समुद्री जनजीवन को नुकसान पहुंच सकता है।
प्राधिकारियों ने पिछले हफ्ते आग बुझा दी थी लेकिन जहाज डूबना शुरू हो गया था। जहाज गुरुवार तक आंशिक तौर पर डूबा रहा। सरकार ने संयुक्त राष्ट्र और कुछ अन्य देशों से समुद्री पर्यावरण और तटीय इलाकों को हुए नुकसान का आकलन करने में मदद मांगी है। श्रीलंका ने एक्स-प्रेस फीडर्स को चार करोड़ डॉलर का हर्जाना देने को कहा है।