कैलिफोर्निया में शशि थरूर और भाजपा नेताओं के बीच लोकसभा सीटें 850 करने पर तीखी बहस हुई। थरूर ने इसे लोकतंत्र के लिए मजाक बताया। वहीं, भाजपा नेताओं ने इसे बढ़ती जनसंख्या और जनता के प्रति जवाबदेही के लिए एक जरूरी लोकतांत्रिक कदम करार दिया।
रविवार को कैलिफोर्निया में आयोजित 'स्टैनफोर्ड इंडिया कॉन्फ्रेंस 2026' में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने को लेकर कांग्रेस और भाजपा नेताओं के बीच बड़ी बहस हुई। इस दौरान कांग्रेस नेता शशि थरूर ने लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाकर 850 करने के विचार को एक मजाक बताया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या होने से भारतीय संसद चीन की 'पीपुल्स कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस' के देसी संस्करण जैसी बन जाएगी। वहां सदस्य केवल बड़े नेता के आने पर मेज थपथपाते हैं, लेकिन उन्हें बोलने या बहस करने का मौका नहीं मिलता।
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क्या बोले थरूर?
थरूर ने अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 1929 से अब तक सदस्यों की संख्या 435 ही बनी हुई है, जबकि वहां की आबादी तीन गुना बढ़ चुकी है। उन्होंने तर्क दिया कि 850 सदस्यों के साथ सदन में कोई चर्चा संभव नहीं है। थरूर ने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का तुरंत समर्थन करने को तैयार है, इसे परिसीमन के लिए रोकना नहीं चाहिए। उनके अनुसार, जनगणना के आंकड़ों के बाद 2034 के चुनाव तक भारत का नया राजनीतिक नक्शा तैयार होना चाहिए।
भाजपा सांसद ने क्या कहा?
दूसरी तरफ, भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने थरूर की बातों का कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ की आबादी वाले लोकतंत्र में 1971 की जनसंख्या के आधार पर सीटें तय करना सही नहीं है। उन्होंने वर्तमान 543 सीटों को समय के हिसाब से बहुत कम बताया। सूर्या ने कहा कि परिसीमन एक 'लोकतांत्रिक जरूरत' है। इससे चुने हुए प्रतिनिधियों की जवाबदेही बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि अभी एक सांसद 22 से 30 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। इस कारण आम जनता के लिए अपने सांसद से मिलना और काम करवाना मुश्किल हो जाता है।
भाजपा नेता के. अन्नामलाई ने इस मुद्दे पर उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच एक 'बड़े समझौते' की बात कही। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु जैसे राज्यों में प्रजनन दर काफी कम है। जनगणना के नतीजे आने के बाद उत्तर भारतीय राज्यों में सांसदों की संख्या बढ़ना स्वाभाविक है। अन्नामलाई ने कहा कि सरकार ऐसा रास्ता निकालना चाहती है जिससे किसी भी राज्य को यह न लगे कि उसका नुकसान हुआ है। यह पूरी चर्चा 'इंडिया, दैट इज भारत: ग्रोथ, गवर्नेंस एंड आइडेंटिटी' सत्र के दौरान हुई। इसमें नेताओं ने देश के भविष्य और राजनीतिक ढांचे पर अपनी राय रखी।