पश्चिमी अफ्रीकी देश माली की राजधानी बमाको एक बार फिर गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठी है। शनिवार तड़के बमाको के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और कई अन्य शहरों के पास भारी गोलीबारी की आवाजें सुनी गई हैं। इस अचानक हुई फायरिंग ने स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। माली लंबे समय से आतंकी हमलों का सामना कर रहा है।
सुबह मोदिबो केइता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास से लगातार भारी हथियारों और स्वचालित राइफलों से फायरिंग की आवाजें आ रही थीं। यह हवाई अड्डा शहर के बीचों-बीच से लगभग 15 किलोमीटर (9 मील) की दूरी पर स्थित है। इस हवाई अड्डे के ठीक बगल में माली की वायु सेना का एक एयर बेस भी मौजूद है। हालांकि, अभी तक यह बिल्कुल साफ नहीं हो पाया है कि यह गोलीबारी किसने की है और इसके पीछे की असली वजह क्या है। खबर लिखे जाने तक किसी भी हथियारबंद गुट ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
आसमान में हेलीकॉप्टर क्यों लगा रहे हैं गश्त?
गोलीबारी की घटना के बाद इलाके में सुरक्षा काफी कड़ी कर दी गई है। हवाई अड्डे के पास रहने वाले एक स्थानीय नागरिक ने अपनी सुरक्षा के डर से नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उसने भी भारी गोलियों की आवाज सुनी है। इसके साथ ही, लोगों ने आसपास के इलाकों और आसमान में कम से कम तीन हेलीकॉप्टरों को गश्त लगाते हुए देखा है। सेना और सुरक्षा बल स्थिति को नियंत्रण में करने और हमलावरों की तलाश के लिए पूरे इलाके पर हवाई नजर रख रहे हैं। अचानक हुई इस घटना ने लोगों के मन में गहरा डर पैदा कर दिया है।
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क्या माली में पहले भी हो चुके हैं ऐसे बड़े हमले?
यह पहली बार नहीं है जब माली की राजधानी को इस तरह से निशाना बनाया गया है। इसी साल 2024 में, अल-कायदा से जुड़े एक आतंकी समूह ने बमाको के इसी हवाई अड्डे और राजधानी में स्थित एक सैन्य प्रशिक्षण शिविर पर बहुत बड़ा हमला किया था। उस दर्दनाक हमले में कई लोगों की जान चली गई थी। माली पिछले एक दशक से अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े कई खूंखार हथियारबंद समूहों से लगातार जंग लड़ रहा है। यह खूनी लड़ाई सिर्फ माली तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पड़ोसी देशों नाइजर और बुर्किना फासो में भी पूरी तरह से फैली हुई है।
क्यों लगातार बिगड़ रही है माली और पड़ोसी देशों की सुरक्षा?
पिछले कुछ वर्षों में माली, नाइजर और बुर्किना फासो में सेना ने तख्तापलट करके सत्ता हथिया ली है। सत्ता में आने के बाद इन सैन्य सरकारों (जुंटा) ने इस्लामिक आतंकियों से लड़ने के लिए अपने पुराने पश्चिमी सहयोगियों से नाता तोड़ लिया है और अब वे रूस से मदद ले रहे हैं। इसके बावजूद जानकारों का मानना है कि इन देशों में सुरक्षा के हालात हाल के दिनों में बहुत ज्यादा खराब हो गए हैं। आतंकियों के हमलों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। इसके अलावा, सरकारी सेनाओं पर भी यह गंभीर आरोप लग रहे हैं कि वे उन बेगुनाह आम नागरिकों को मार रहे हैं, जिन पर उन्हें आतंकियों का साथ देने का जरा सा भी शक होता है।
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