आज की तारीख तक हम अपने कामकाज में बड़े व्यवधानों को किसी तरह रोक पाए हैं... लेकिन ये प्रयास पर्याप्त नहीं है। अगर और ज्यादा सदस्य देशों ने बजट की बकाया राशि का योगदान नहीं दिया तो ऐसा हो सकता है कि सचिवालय वेतन और सामग्री व सेवाओं का नवंबर महीने में भुगतान ना कर पाए।
पांचवी समिति (Fifth Committee) पर बजट की रूपरेखा तय करने की जिम्मेदारी है। यूएन महासभा में समिति को संबोधित करते हुए महासचिव ने कहा कि, इस महीने हम इस दशक के सबसे गहरे घाटे में पहुंच जाएंगे। संगठन एक गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है... एक गंभीर नकदी संकट। समीकरण का अंदाजा लगाना आसान है, नकदी के अभाव में बजट को सही ढंग से लागू नहीं किया जा सकता।
यूएन प्रमुख के अनुसार बजट को योजनाबद्ध तरीके से अमल में लाने के बजाय नकदी की उपलब्धता के हिसाब से लागू किया जा रहा है। नकदी कम होने की वजह से नए पदों पर नियुक्तियां बेहद सीमित संख्या में हो रही हैं और और गैर-वैतनिक खर्च भी सीमित हो गया है। इससे यूएन के कामकाज और नतीजों पर ध्यान केंद्रित करने के प्रयासों पर असर पड़ रहा है।
पिछले सप्ताह यूएन प्रमुख ने कहा था कि रिकॉर्ड स्तर पर नकदी की कमी होने की वजह से उन्हें असाधारण कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा है। रिक्त पड़े पदों पर नियुक्ति नहीं हो पा रही है, यात्राएं तभी की जा रही हैं जब वे बेहद जरूरी हों, बैठकें टाली या स्थगित की जा रही हैं। इन कारणों से यूएन के कामकाज पर ना सिर्फ न्यूयॉर्क, जिनीवा, वियना और नैरोबी कार्यालयों बल्कि क्षेत्रीय आयोगों पर भी असर होगा।