4) 'कुलीन वर्ग' के खिलाफ लड़ाई
सिर्फ गुसिन्सकी ही नहीं थे जिन्हें पुतिन का शिकार होने पड़ा। बीबीसी डाक्यूमेंट्री 'द न्यू जार' के मुताबिक पुतिन ने अपनी आंखों से देखा कि कैसे बोरिस येल्तसिन की सरकार में 'कुलीन वर्ग' का प्रभाव कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था। इसलिए पुतिन ने उन पर नियंत्रण करने की ठानी, इससे पहले कि वे पुतिन पर नियंत्रण कर लें। इस तरह 'कुलीन वर्ग' के हाई-प्रोफाइल लोग जैसे लॉबिस्ट बोरिस बेरेजोव्सकी और तेल के बड़े व्यापारी मिखाइल खोदोरकोव्सकी बदनामी के गड्ढे में धकेल दिए गए। भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल काटी या देश छोड़ने पर मजबूर हुए। खोदोरकोव्सकी को 2013 में स्विटजरलैंड में शरण लेनी पड़ी और उसी साल बोरिस बेरेजोव्सकी ब्रिटेन के अपने घर में संदिग्ध हालत में मृत पाए गए थे।
5) 'आपका रूस मेरा रूस'
राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय जानकारों का मानना है कि पुतिन ने 'महान रूस' की छवि बनाने की कोशिश की जिसमें राष्ट्रवाद, सेना और धर्म को बढ़ावा दिया। उनकी मंशा था कि एक मजबूत रूसी पहचान लोगों के मन में बैठा दी जाए ताकि जनता गर्व महसूस करे कि वे क्या हैं और उनके पास क्या है। साथ ही पुतिन को इस तरह दिखाया गया कि वे एक मजबूत व्यक्ति हैं जो सेना के नेतृत्व के करीब हैं और चर्च के भी जो कि देश पर नैतिक दबदबा रखता है। इससे पुतिन की लोकप्रियता में इजाफा हुआ। रूस की छवि को एक मजबूत देश के तौर पर दिखाया गया जिसका नेतृत्व मजबूत हाथों में है और जो अंतरराष्ट्रीय दबाव में नहीं आता है।
6) 'नियंत्रित लोकतंत्र'
किंग्स कॉलेज, लंदन में रशियन इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर सेम्युअल ग्रीन ने बीबीसी को बताया कि 'नियंत्रित लोकतंत्र' के सिद्धांत ने विरोध ना पनपने में पुतिन की काफी मदद की। ग्रीन के मुताबिक मीडिया पर नियंत्रण के साथ-साथ पुतिन ने सिविल सोसाइटी का भी विकल्प खड़ा किया। खुद ऐसे संगठन बनाए और उन्हें आर्थिक मदद दी जो कि वक्त पड़ने पर जनता और राजनीति में अगुआई कर सके और विरोधी संगठनों को पनपने से रोक सकें। पुतिन ने सुनिश्चित किया कि जैसे ही कोई विरोध हो, वह अपने समर्थकों को आगे कर दें इससे पहले कि विपक्ष सामने आए।
ग्रीन ने बताया कि पुतिन ने एक और तरीका अपनाया कि रूस की जनता को आभास हो कि वे एक
लोकतंत्र में रहते हैं और उनके पास भी वैसे ही विकल्प हैं जैसे कि दुनिया के सामान्य लोकतांत्रिक देशों में होते हैं। इसके लिए पुतिन के लोगों ने संसद में मौजूद दूसरी पार्टियों से रिश्ते बनाने में काफी मेहनत की। उदाहरण के तौर पर उन्होंने दूसरे राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ नियमित तौर पर मुलाकातें की ताकि उन्हें स्पष्ट कर सकें कि वो क्या मुद्दा उठा सकते हैं और क्या नहीं और कैसे पैसा इकट्ठा कर सकते हैं और कैसे नहीं। ग्रीन के मुताबिक इससे पार्टियां भी सरकार की वफादार बनी रहीं।
7) परोक्ष युद्ध
पुतिन सरकार के दो सैन्य दख्ल का आधार यही कांसेप्ट है - 2014 में यूक्रेन और 2015 में सीरिया। अधिकारिक तौर पर रूस ने यूक्रेन युद्ध को ये कहकर जायज ठहराया कि यूक्रेन में रूस के हितों के लिए जरूरी था और दूसरा युद्ध जिहादियों से लड़ने के लिए रूस के सहयोगी बशर-अल-असद की मदद मांगने पर किया। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रॉय एलिसन के मुताबिक यूक्रेन और सीरिया में रूस की कार्रवाई, जानकारों के हिसाब से नॉन लीनियर वॉरफेयर का एक उदाहरण है, इनसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान भटका और उन्होंने रूस की इन हरकतों को जाने दिया। प्रोफेसर रॉय के हिसाब से रूस के पास वो ताकत नहीं है कि वो अमरीका या नाटो को चुनौती दे सके। इसलिए उसकी रणनीति रहती है कि विश्व को वो संशय में रखे कि रूस क्या कर रहा है या क्या करने वाला है।