पाकिस्तान में रोज बिगड़ रहे आर्थिक हालत को संभालने में जुटी शहबाज शरीफ सरकार के सामने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक नई चुनौती पेश कर दी है। उन्होंने अगले दो जुलाई से देश भर में आंदोलन शुरू करने का एलान कर दिया है। इमरान खान ने बढ़ती महंगाई और नेशनल एकाउंटिबिलिटी ब्यूरो (एनएबी) कानून में संशोधन के विरोध में ये घोषणा की है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस आंदोलन से देश में अस्थिरता का माहौल और गरमाएगा। इसका खराब असर सरकार की अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से कर्ज पाने की कोशिशों पर भी पड़ सकता है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता आसिम इफ्तिखार ने पत्रकारों से बातचीत में साफ कहा कि रूस पर लगाए गए पश्चिमी देशों के प्रतिबंध से पाकिस्तान का आर्थिक संकट और गंभीर हो गया है। उन्होंने कहा- ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है और इसके कई तरह के परिणाम हुए हैं। इनका अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खास कर पाकिस्तान जैसे विकासशील देशों पर खराब असर पड़ा है।’
पर्यवेक्षकों के मुताबिक पाकिस्तान सरकार की इस स्वीकृति से इमरान खान और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के इस दावे को बल मिलेगा कि पाकिस्तान के लोगों की मुसीबत का कारण शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) सरकार है। इमरान खान कई बार कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने रूस से सस्ता तेल खरीदने का समझौता कर लिया था, जिसे ‘अमेरिकी साजिश के तहत बनी आयातित सरकार’ ने पलट दिया। इमरान खान ने इस बारे में बार-बार भारत की तारीफ की है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका की सहयोगी होने के बावजूद भारत सरकार ने अपनी जनता के हित को सबसे ऊपर रखा।
रविवार को एक लाइव प्रसारण के जरिए जनता को संबोधित करते हुए खान ने आरोप लगाया कि ‘आयातित सरकार’ ने पाकिस्तान को ‘बनाना रिपब्लिक’ में तब्दील कर दिया है। उसने जनता के लूटे गए धन की जवाबदेही तय करने के लिए गठित एनएबी की ताकत कम कर दी है। एनएबी का गठन पूर्व इमरान खान सरकार ने किया था।