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Seoul Halloween Stampede: हैलोवीन कब और क्यों मनाया जाता है, जानें इस त्योहार के बारे में सबकुछ

Sun, 30 Oct 2022 04:51 AM IST
देव कश्यप वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सियोल।

सार

हैलोवीन हर साल 31 अक्तूबर को ही मनाया जाता है, जो एक नवंबर को मनाया जाने वाला पश्चिमी ईसाई पर्व ऑल हैलोज डे की पूर्व संध्या को चिह्नित करता है। यह ईसाईयों का एक त्योहार है। हैलोवीन का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में तरह-तरह के डरावने चित्र उभरने लगते हैं।
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हैलोवीन। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल के इटावन में शनिवार को एक लोकप्रिय नाइट स्पॉट हैलोवीन पर भारी भीड़ जुटने के बाद भगदड़ मच गई। हैलोवीन भगदड़ में मरने वालों की संख्या 145 से ज्यादा हो गई है। वहीं, 150 अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। सियोल में पैक्ड हैलोवीन उत्सव के दौरान भीड़ बढ़ने से भगगड़ मच गई, जिसमें कई लोग घायल हुए हैं। बताया गया है कि कोरोनाकाल के बाद से यह पहला मौका था, जब हैलोवीन पर इतनी संख्या में भीड़ इकट्ठा हुई। हैलोवीन को ज्यादातर अमेरिका, इंग्लैंड व यूरोपीय देशों के लोग मनाते है, लेकिन इस त्यौहार की शुरुआत आयरलैंड और स्कॉटलैंड से हुई है। आइये जानते हैं इसके मनाने का कारण, इतिहास और इस त्योहरा से जुड़े रोचक तथ्य।

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31 अक्तूबर को मनाया जाता है हैलोवीन
हैलोवीन हर साल 31 अक्तूबर को ही मनाया जाता है, जो एक नवंबर को मनाया जाने वाला पश्चिमी ईसाई पर्व ऑल हैलोज डे की पूर्व संध्या को चिह्नित करता है। यह ईसाईयों का एक त्योहार है। हैलोवीन का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में तरह-तरह के डरावने चित्र उभरने लगते हैं। हैलोवीन गतिविधियों में ट्रिक-या-ट्रीटिंग, कॉस्ट्यूम पार्टियों में भाग लेना, कद्दू को तराशना, अलाव जलाना, खेल, शरारते करना और हैलोवीन-थीम वाली फिल्में देखना शामिल हैं। ईसाई धर्म में कई प्रकार के त्योहार मनाये जाते हैं जैसे क्रिसमस, गुड फ्राइडे, ईस्टर और हैलोवीन।

हैलोवीन शब्द अपने स्कॉटिश रूप 'सभी हैलोज की पूर्व संध्या' से आया है। शब्द Halloween (वैकल्पिक और उसके समर्पण Hallowe'en) जिसका अर्थ है अखिल- पवित्र करना, यह "आत्माओं का दिवस" की पूर्व संध्या है, जो कि अब  'संन्यासी दिवस' के नाम से भी जाना जाता है। पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए इस त्योहार को मनाया जाता है। वैसे तो लोग त्योहारों में नए-नए कपड़े पहनते हैं, लेकिन इस त्योहार में लोग ऐसे कपड़े और मेकअप करते हैं जिससे वो डरावने लगें। ईसाई इस त्योहार को धूमधाम से मनाते हैं। हैलोवीन को आल हैलोस ईव, ऑल हैलोस इवनिंग, ऑल हैलोवीन और ऑल सैंट्स ईव के नाम से भी जाना जाता है।  इस त्योहार को दुनिया भर में कई जगह गैर-ईसाई लोग भी धूमधाम से मनाते हैं।
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हैलोवीन का इतिहास
इतिहास के अनुसार हैलोवीन दिवस को करीब 2000 वर्ष से पहले ‘आल सेट्स डे’ के रूप में पूरे उत्तरी यूरोप में मनाया जाता था। वहीं कुछ इतिहासकारों का कहना है कि हैलोवीन प्राचीन सेल्टिक त्योहार जिसे सम्हैन कहा जाता है, से संबंधित है। इस दिन पर मान्यता है कि मरे हुए लोगों की आत्माएं उठती है और धरती पर प्रकट हो कर जीवित आत्माओं के लिए परेशानी पैदा करती हैं। इन बुरी आत्माओं से डर भगाने के लिए लोग राक्षस जैसे कपड़े पहनते हैं। इसके अलावा इन्हें भगाने के लिए हर जगह आग जलाकर उसमें मरे हुए जानवरों की हड्डियां उसमें फेंकी जाती है।

सेल्टिक कैलेंडर का आखिरी दिन
यह दिन सेल्टिक कैलेंडर का आखिरी दिन होता है। इसलिए सेल्टिक लोगों के बीच यह नए वर्ष की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है। इसे ऑल सेंट्स डे भी कहा जाता है जोकि एक नवंबर को मनाया जाता है। ऑल सेंट्स डे से पहले ऑल हेलोस ईव की शाम होती है। जिसे अब हैलोवीन ईव के नाम से जाना जाता है। इस उत्सव में मूर्तियों की पूजा की जाती थी, लेकिन कुछ पोप्स ने इसे दूसरे ईसाई धर्म के साथ मिलाने की कोशिश की, जिसके परिणामस्वरूप ऑल सेंटस डे और हैलोवीन डे एक ही दिन मनाया जाने लगा।

हैलोवीन मनाने का तरीका
हैलोवीन दिवस को मनाने तरीका काफी अलग है। कथाओं के अनुसार आइरिश लोग हैलोवीन पर जैक ओ लैंटर्न बनाते हैं। लोग कद्दू को खोखला करके उसमें आंख, नाक और मुंह बनाते हैं और अंदर मोमबत्ती जलाते हैं। जिसे घर के बाहर या फिर पेड़ों पर लटका दिया जाता है। जिसके बाद उसे दफना दिया जाता है। इस दिन लोग डरावने कपड़े पहनते हैं और लोगों के घर-घर जा कर कुछ कैंडी उपहार में देते हैं। इस दिन बच्चे कद्दू (Pumpkin) जैसे आकार का बैग लेकर घर-घर जाते हैं। बच्चे इस दिन पड़ोसी और रिश्तेदारों से चॉकलेट्स लेते हैं। कई देशों में इसकी अलग-अलग प्रथा है।

इस दिन की सबसे अलग पहचान यह है कि इस त्योहार को मनाने के लिए लोग अलग-अलग प्रकार की वेश-भूषा धारण करते हैं, जो इस त्योहार की संस्कृति है। इस दिन लोगों के कपड़े दानव, शैतान, भूत, पिशाच, ग्रीम रीपर, मोंस्टर, ममी, कंकाल, वैम्पायर, करामाती, वेयरवोल्फ और चुडैलों आदि से प्रभावित होते हैं। हैलोवीन पर लोग डरावने कपड़े पहनते हैं और जमकर पार्टी करते हैं। इस दिन दोस्त और परिवार मिलकर कई गेम खेलते हैं। ऐसा ही एक गेम है एप्पल बोबिंग। जिसमें पानी के टब में एप्पल रहते हैं, जो दांत से सबसे पहले बाहर फेकता है वो विनर होता है। लोग तरह-तरह से हैलोवीन पर एन्जॉय करते हैं।

हैलोवीन का सबसे रोचक तथ्य
क्रिसमस के बाद हैलोवीन अमेरिकन व यूरेपियन देशों में मनाया जाने वाला सबसे बड़ा त्योहार है। हैलोवीन के दिन अमेरिका में बच्चे ट्रिक और ट्रीट मनाते है और पड़ोसियों के घर में जाकर बोलते है ट्रिक और ट्रीट। तब पडोसी उन्हें ट्रीट बोलकर उन्हें खाने के लिए चॉकलेट देते हैं। केल्टिक लोगों ने ट्रिक और ट्रीट की शुरुआत की थी। जिसमें वो अपने घरों के बाहर खाने पीने की वस्तुएं रखकर आत्माओं को बुलाते थे।

लोग हैलोवीन पर कद्दू को क्यों तराशते हैं?
इस दिन लोग हैलोवीन थीम के आकार की कैंडी, हैलोवीन केक, नोवेल्टी कैंडी का आकार जैसे खोपड़ी, कद्दू, चमगादड़ और कीड़े आदि बनाते हैं। साथ ही कद्दू पाई, कद्दू ब्रेड, पॉपकॉर्न, पौंड केक, कद्दू की प्यूरी के साथ भरा हुआ रामेकिन्स, भुने हुए कद्दू के बीज एवं स्वीट कॉर्न और आत्माओं के शेप वाले केक आदि भी खुब बनते हैं। हैलोवीन पर मूल रूप से शलजम की नक्काशी शामिल है क्योंकि यह स्टिंगी जैक की एक कथा से प्रेरित है, जिसके बारे में कहा जाता है कि उसने शैतान को फंसा लिया था, केवल उसे इस शर्त पर जाने दिया कि वह कभी नरक में नहीं जाएगा। जब आयरिश प्रवासी इस विचार को अमेरिका ले गए, तो उन्होंने शलजम के बजाय कद्दू का उपयोग करना शुरू कर दिया।

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