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H-1B और ग्रीन कार्ड पर बढ़ेगी सख्ती?: PERM नियम बदलने की मांग, भारतीय प्रोफेशनल्स की कैसे बढ़ेंगी मुश्किलें?

Sat, 08 Aug 2026 11:25 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

अमेरिका में रिपब्लिकन सीनेटर एरिक श्मिट ने श्रम विभाग से एच-1बी और ग्रीन कार्ड के रास्ते से जुड़ी पीईआरएम प्रक्रिया में बड़े बदलाव करने को कहा है। इस प्रस्ताव का असर सबसे ज्यादा भारतीय टेक प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है।
 
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सीनेटर एरिक श्मिट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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रिपब्लिकन सीनेटर एरिक श्मिट ने अमेरिकी श्रम विभाग से पीईआरएम प्रक्रिया में व्यापक बदलाव करने की मांग की है। उनका आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था का दुरुपयोग कर कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी श्रमिकों को मौका देती हैं। प्रस्ताव में अमेरिकी आवेदकों के रिकॉर्ड रखने, रिजेक्शन का कारण दर्ज करने, योग्य बेरोजगार अमेरिकियों को नौकरी की जानकारी देने और उनका इंटरव्यू लेने जैसे कड़े प्रावधान सुझाए गए हैं। चूंकि वित्त वर्ष 2025 में स्वीकृत एच-1बी याचिकाओं में 70 प्रतिशत भारतीयों की थीं, इसलिए प्रस्तावित बदलावों का असर भारतीय टेक प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह केवल बदलाव का प्रस्ताव है और इसका वास्तविक असर श्रम विभाग के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।

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आखिर पीईआरएम प्रक्रिया में बदलाव की मांग क्यों उठी?
सीनेटर एरिक श्मिट ने कार्यवाहक श्रम सचिव कीथ सॉन्डरलिंग को पत्र लिखकर पीईआरएम यानी प्रोग्राम इलेक्ट्रॉनिक रिव्यू मैनेजमेंट प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की मांग की है। नियोक्ता आमतौर पर पीईआरएम का इस्तेमाल किसी विदेशी कर्मचारी को अमेरिका में स्थायी नौकरी दिलाने और उसके लिए ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया शुरू करने के पहले चरण के तौर पर करते हैं।

क्या कंपनियां सस्ते विदेशी श्रमिकों को रख रही?
एरिक श्मिट ने लिखा,'पीईआरएम और एच-1बी प्रोग्राम के दुरुपयोग से कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की जगह सस्ते विदेशी श्रमिकों को रख लेती हैं। विभाग को इस दुरुपयोग को रोकना चाहिए और नियमों के असली मकसद को बहाल करना चाहिए।' 
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क्या भारतीयों को लेकर सीधे कोई बदलाव प्रस्तावित है?
उन्होंने पत्र में भारत का नाम नहीं लिया और न ही एच-1बी या ग्रीन कार्ड के नियमों में सीधे बदलाव का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने सिर्फ श्रम विभाग से नियमों को दोबारा लिखने और ऑडिट, संदिग्ध धोखाधड़ी तथा पीईआरएम आवेदकों के ओपीटी और एच-1बी वीजा के पिछले इस्तेमाल से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करने को कहा है।

भारतीय प्रोफेशनल्स पर इसका असर क्यों पड़ सकता है?
अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में स्वीकृत सभी एच-1बी याचिकाओं में 70 प्रतिशत भारतीयों की थीं। कई भारतीय छात्र स्टूडेंट वीजा और ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी) के जरिए एच-1बी नौकरी तक पहुंचते हैं और इसके बाद नियोक्ता द्वारा प्रायोजित स्थायी निवास के लिए आवेदन करते हैं।

क्या ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया जटिल होगी?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भर्ती से जुड़े दस्तावेजों की जांच सख्त की गई तो नियोक्ताओं पर अनुपालन का बोझ बढ़ेगा और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में भी जांच कड़ी हो सकती है। पहले से ही जटिल मानी जाने वाली स्पॉन्सरशिप प्रक्रिया और लंबी हो सकती है। हालांकि, अंतिम असर इस बात पर निर्भर करेगा कि श्रम विभाग एरिक श्मिट के प्रस्तावों को किस हद तक अपनाता है।

20 साल पुराने पीईआरएम नियमों पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
एरिक श्मिट ने कहा कि पीईआरएम के नियम 20 साल से ज्यादा समय से नहीं बदले हैं। गैर-पेशेवर पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया में आमतौर पर दो अखबारों में विज्ञापन देना और राज्य रोजगार एजेंसी में पंजीकरण कराना जरूरी है। वहीं, पेशेवर पदों के लिए ऑनलाइन विज्ञापन देना अनिवार्य नहीं है।

क्या पुराने भर्ती नियमों की वजह से हो रहा नुकसान?
उन्होंने लिखा,'अखबारों का प्रचलन घटने और ऑनलाइन आवेदन आम होने के बावजूद पुराने नियमों की वजह से नियोक्ता नौकरियों को अमेरिकियों से छिपा लेते हैं और दिखाते हैं कि उन्होंने घरेलू स्तर पर भर्ती की कोशिश की।' 

हर अमेरिकी आवेदक का रिकॉर्ड रखने का प्रस्ताव क्यों है?
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि नियोक्ताओं को हर अमेरिकी आवेदक का रिकॉर्ड रखना होगा, हर रिजेक्शन की वजह बतानी होगी और यह प्रमाणित करना होगा कि पद विदेशी कर्मचारी के लिए पहले से तय नहीं था।

क्या योग्य अमेरिकी उम्मीदवारों को इंटरव्यू देना भी जरूरी होगा?
साथ ही, हाल में नौकरी गंवा चुके योग्य अमेरिकियों को इसकी सूचना देनी होगी, जरूरी योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों का इंटरव्यू लेना होगा और उन्हें चयनित नहीं करने की लिखित वजह भी देनी होगी।

एरिक श्मिट मौजूदा भर्ती व्यवस्था में क्या बदलना चाहते हैं?
एरिक श्मिट ने कहा, 'वर्तमान नियम अमेरिकी आवेदकों पर सिर्फ खानापूर्ति करने की इजाजत देता है। विभाग को इसे ऐसे सिस्टम से बदलना चाहिए, जहां बेरोजगार अमेरिकी को नौकरी के लिए असली मौका मिले।'

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क्या पीईआरएम और एच-1बी एक ही कार्यक्रम हैं?
पीईआरएम और एच-1बी अलग-अलग कार्यक्रम हैं। एच-1बी विशेष पेशों में अस्थायी नौकरी की अनुमति देता है, जबकि पीईआरएम का इस्तेमाल आमतौर पर स्थायी निवास की प्रक्रिया के लिए किया जाता है। एरिक श्मिट के पत्र में किसी वीजा, आवेदन या मौजूदा आव्रजन स्थिति को तुरंत रद्द करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

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