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SCO Tianjin: भारत चीन की 'बेल्ट एंड रोड पहल' के खिलाफ अडिग; एससीओ देश विकास बैंक बनाने पर सहमत; जानिए सबकुछ

Mon, 01 Sep 2025 08:44 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

एससीओ शिखर सम्मेलन में भारत ने चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का समर्थन करने से फिर इनकार कर दिया। भारत का कहना है कि इसमें शामिल चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा उसकी संप्रभुता का उल्लंघन करता है। शिखर सम्मेलन में सभी सदस्य देशों ने विकास बैंक (डेवलपमेंट बैंक) स्थापित करने को मंजूरी दे दी। यह प्रस्ताव चीन की ओर से पेश किया गया था और लगभग दस साल की चर्चाओं के बाद इस पर सहमति बनी।
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एससीओ की बैठक - फोटो : PTI
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विस्तार
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शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में भारत ने एक बार फिर चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का समर्थन करने से इनकार कर दिया। भारत संगठन का एकमात्र ऐसा सदस्य देश रहा जिसने इस परियोजना का अनुमोदन नहीं किया। सम्मेलन के अंत में जारी घोषणा पत्र में रूस, बेलारूस, ईरान, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने बीआरआई को समर्थन दिया, लेकिन भारत अपने पुराने रुख पर कायम रहा। वहीं, इस दौरान भारत समेत सभी सदस्य देशों ने विकास बैंक (डेवलपमेंट बैंक) स्थापित करने के लिए मंजूरी दे दी।
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बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव पर भारत का यह विरोध नया नहीं है। इससे पहले भी भारत ने किसी भी एससीओ बैठक या शिखर सम्मेलन में बीआरआई का समर्थन नहीं किया था। चीन का यह मेगा कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट एशिया से लेकर यूरोप और अफ्रीका तक आर्थिक गलियारे बनाने की योजना रखता है। लेकिन भारत इसे अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानता है क्योंकि इसमें चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) शामिल है, जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से होकर गुजरता है।

भारत की आपत्ति
भारत की सबसे बड़ी आपत्ति यही है कि बीआरआई का एक हिस्सा पीओके से होकर गुजरता है। भारत मानता है कि यह उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में स्पष्ट कहा कि कोई भी कनेक्टिविटी परियोजना अगर संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को नजरअंदाज करती है तो वह विश्वास और महत्व दोनों खो देती है। उन्होंने यह भी दोहराया कि एससीओ चार्टर के मूल सिद्धांतों में भी संप्रभुता और आपसी सम्मान को सर्वोच्च रखा गया है।
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अन्य देशों का समर्थन
भारत के विरोध के बावजूद अधिकतर एससीओ सदस्य देश चीन के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के साथ खड़े दिखे। घोषणा पत्र में कहा गया कि सदस्य देशों ने इस परियोजना के क्रियान्वयन को आगे बढ़ाने और इसे यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन से जोड़ने की संभावनाओं को नोट किया है। इसमें व्यापक, खुला और परस्पर लाभकारी सहयोग का आह्वान किया गया। चीन लगातार इस परियोजना को वैश्विक विकास के लिए अहम बता रहा है।

विकास बैंक को मिली मंजूरी
शिखर सम्मेलन में सभी सदस्य देशों ने विकास बैंक (डेवलपमेंट बैंक) स्थापित करने को मंजूरी दे दी। यह प्रस्ताव चीन की ओर से पेश किया गया था और लगभग दस साल की चर्चाओं के बाद इस पर सहमति बनी। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने सोमवार को घोषणा करते हुए कहा कि यह बैंक क्षेत्रीय सामाजिक विकास और दक्षता बढ़ाने में मदद करेगा।

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पर्यवेक्षक के तौर पर अफगानिस्तान-मंगोलिया भी शामिल
वांग यी ने बताया कि एससीओ ने लाओस को नए साझेदार के रूप में मंजूरी दी है। इसके अलावा, पर्यवेक्षक देशों और संवाद भागीदारों को मिलाकर एकीकृत एससीओ पार्टनर की श्रेणी बनाई जाएगी। इस कदम का मकसद संगठन की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाना है। वर्तमान में संगठन में रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान, ईरान और बेलारूस समेत 10 सदस्य देश शामिल हैं, जबकि अफगानिस्तान और मंगोलिया पर्यवेक्षक हैं।

वांग यी ने कहा कि एससीओ इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को शुरू करेगा और यूरेशिया क्षेत्र में एक और बहुपक्षीय मंच जुड़ जाएगा। हालांकि, बैंक की स्थापना के लिए समयसीमा का अभी खुलासा नहीं किया गया है। उन्होंने इसे न सिर्फ सदस्य देशों बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक जश्न मनाने योग्य उपलब्धि बताया।

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