एससीओ की बैठक में तुर्किये के राष्ट्रपति रजिब तैयिब एर्दोआन भी आएंगे। बेलारुस और मंगोलिया के राष्ट्रपतियों को भी यहां आमंत्रित किया गया है। उधर पर्यवेक्षकों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति से समरकंद बैठक ये संदेश भेजने में सफल रह सकता है कि दुनिया के प्रमुख उभरते हुए देश मिल कर पश्चिमी एजेंडे को नकार रहे हैं। विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि अब एससीओ में शामिल देशों में दुनिया की 42 फीसदी आबादी रहती है, जबकि उनकी साझा जीडीपी वैश्विक जीडीपी के 25 फीसदी के बराबर है।
थिंक टैंक यूरेशिया ग्रुप से जुड़े एक अमेरिकी सलाहकार ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा कि शी जिनपिंग लगातार अपनी विदेश नीति में गैर-पश्चिमी देशों को तरजीह दे रहे हैं। इसीलिए महामारी के बाद उन्होंने अपनी विदेश यात्रा में पहला मुकाम एससीओ की शिखर बैठक बनाया है।