अमेरिका के हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में जेनेटिक्स के प्रोफेसर और इस अध्ययन के वरिष्ठ लेखक डेविड सिंक्लेयर ने कहा, “हमारा अध्ययन यह प्रदर्शित करता है कि रेटिना जैसे जटिल उत्तकों की उम्र को सुरक्षित तरीके से पीछे ले जाना और उनके युवावस्था के जैविक कामकाज को फिर से बहाल करना संभव है।”
शोधकर्ताओं का मानना है कि आगे के अध्ययनों में भी अगर यह परिलक्षित होता है, तो यह उम्र को कम करने और इंसानों में उम्र संबंधी बीमारियों के उपचार के नए तरीकों का रास्ता खोल सकता है।
उन्होंने कहा कि ये तीनों जीन, एक चौथे जीन के साथ सामूहिक तौर पर ‘यामानाका’ कारक के तौर पर जाने जाते हैं। चौथे जीन का इस अध्ययन में इस्तेमाल नहीं किया गया था।
प्रयोग के दौरान वैज्ञानिकों ने चूहे के रेटिना में तीन ऐसे जीन भेजे, जो रेटिना की क्षमता को युवावस्था के स्तर तक लाने में सक्षम थे। रेटिना तक जीन को पहुंचाने के लिए एडेनो एसोसिएटेड वायरस (एएवी) का इस्तेमाल किया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि ये तीन जीन ओसीटी4, एसओएक्स2 और केएलएफ4 आमतौर पर भ्रूण के विकास के समय सक्रिय होते हैं। इस प्रयोग के दौरान चूहे की आंखों की रोशनी वापस लाने में भी कामयाबी मिली।