वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस महामारी फैलाने वाले सार्स-कोव-2 में लगभग 200 आनुवंशिक उत्परिवर्तनों (जेनेटिक म्युटेशन) की पहचान की है।
अनुसंधानकर्ताओं (रिसर्चर्स) ने अपने अध्ययन में दुनियाभर में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों में से 7,500 से अधिक लोगों को शामिल कर विषाणु जीन का विश्लेषण किया।
अगर आसान भाषा में समझें तो जीवविज्ञान में जीन में होने वाले स्थायी बदलाव को उत्परिवर्तन कहते हैं। नए कोरोना वायरस में उत्परिवर्तनों की पहचान से दवा या टीके को बनाने में काफी मदद मिल सकती है।
कोरोना वायरस के इन उत्परिवर्तनों से संबंधित अध्ययन रिपोर्ट पत्रिका ‘इन्फेक्शन, जेनेटिक्स एंड इवोल्यूशन’ में प्रकाशित हुई है।
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के रिसर्चर्स के अध्ययन में सार्स-कोव-2 की वैश्विक आनुवंशिक विविधता का एक बड़ा हिस्सा कोरोना वायरस महामारी से सर्वाधिक प्रभावित देशों में मिला।
अध्ययन में यह भी पता चला कि विश्व में तेजी से फैलने से पहले यह नया कोराना वायरस हाल में 2019 के अंत में ही उभरा है।
वैज्ञानिकों ने 198 उत्परिवर्तनों की पहचान की जो स्वतंत्र रूप से एक से अधिक बार घटित हुए लगते हैं। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि यह विषाणु किस तरह अपना रूप बदलता है।