मंगल ग्रह पर पानी की संभावना को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। अमेरिकी और चीन के वैज्ञानिकों की टीम ने मंगल ग्रह पर तीन अरब साल पुराने समुद्र तट की खोज की है। इससे साफ हो गया है कि मंगल ग्रह पर कभी महासागर भी हुआ करता था।
पीएनएएस पत्रिका में छपे एक शोध में इसका जिक्र किया गया है। गुआंगझाउ विश्वविद्यालय के जियानहुई ली के नेतृत्व में किए गए इस शोध में चीनी और अमेरिकी शोधकर्ताओं की एक टीम ने चीन के मंगल यान ‘झुरोंग रोवर’ से मिले डाटा का विश्लेषण किया। इस डाटा में मंगल ग्रह पर अरबों साल पुरानी तटरेखा के पास मौजूद चट्टानों के बारे में जानकारी सामने आई। शोधकर्ताओं के मुताबिक मंगल ग्रह पर प्राचीन समुद्र तट पर पाई जाने वाली चट्टानों के नमूने मिले हैं।
चीन ने झुरोंग मंगल यान को 2020 में प्रक्षेपित किया था। यह 2021 से 2022 तक मंगल ग्रह की सतह पर सक्रिय रहा। झुरोंग मंगल ग्रह के यूटोपिया प्लेनिटिया में उतरा था। झुरोंग रोवर ने ग्रह पर हजारों किलोमीटर के दायरे में फैली पैलियोशोरलाइन के पास के एक क्षेत्र में खोज शुरू की।
शोध के मुताबिक झुरोंग ने यहां 1.3 किलोमीटर लंबी रेखा ट्रांसेक्ट के आसपास का डाटा एकत्र किया। इस दौरान यहां की चट्टानों की प्रकृति के बारे में डाटा जुटाया गया। झुरोंग रोवर ने ग्राउंड पेनिट्रेटिंग राडार की मदद से मंगल ग्रह सतह के 100 मीटर नीचे की संरचना का विश्लेषण किया। इसमें चट्टानों की कई विशेषताओं का पता चला। राडार ने ट्रांसेक्ट के आसपास कुछ चट्टानों में कई परावर्तक परतें पाईं। ये सभी परतें पैलियोशोरलाइन से दूर बेसिन में गहराई में थीं। शोध में कहा गया है कि यह चट्टानें बिल्कुल उसी तरह की थीं जैसे पृथ्वी पर समुद्र के किनारे जमा गाद की होती है।
झुरोंग रोवर ने यूटोपिया प्लेनिटिया से जो डाटा जुटाया था, शोधकर्ताओं ने उसकी तुलना पृथ्वी पर जलाशयों में जमी गाद से जुड़े डाटा से की। उन्होंने पाया कि झुरोंग ने जिन चट्टानों का डाटा जुटाया उनकी बनावट समुद्र के किनारे जमा तटीय गाद से मेल खाती है। इससे साफ है कि झुरोंग ने मंगल ग्रह पर मौजूद प्राचीन समुद्र तट का पता लगाने में सफलता हासिल की है।
नासा ने किया था सतह पर पानी का खुलासा
1970 के दशक में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मैरिनर-9 अंतरिक्ष यान से मिली तस्वीरों के जरिये मंगल ग्रह पर पानी से बनी सतहों की मौजूदगी का खुलासा किया था। इससे साफ हो गया था कि यहां कभी पानी मौजूद था या नहीं। इसके बाद से यहां पानी कब से और कैसे इसे लेकर खोज चल रही थी।
नोआचियन काल में बहता था पानी
मंगल के इतिहास के नोआचियन काल में वहां पानी की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। कई विश्लेषणों से पता चला है कि नोआचियन काल में मंगल की सतह पर पानी बहता था। हालांकि 3.7 से 3 अरब साल पहले के हेस्पेरियन काल के दौरान सतही जल के साक्ष्य कम हैं। इससे लगता है कि हेस्पेरियन काल तक मंगल ग्रह ठंडा होकर सूख गया था।
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