फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना वायरस के नए प्रकारों से वैज्ञानिक चिंतित, लेकिन नहीं हुई हैरानी, ये है वजह

Tue, 22 Dec 2020 03:25 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क

सार

  • नवंबर में दक्षिण अफ्रीका में भी दिखा था कोरोना का नया ‘वैरिएंट’
  • वैज्ञानिकों को भरोसा, कोरोना की वैक्सीन ऐसे तमाम ‘वैरिएंट’ को रोकेगी
विज्ञापन
कोरोना वायरस वैक्सीन - फोटो : iStock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जिस वक्त दुनिया कोविड-19 के वैक्सीन आने की खबरों से राहत महसूस कर रही थी, तभी इंग्लैंड में कोरोना वायरस का एक नया प्रकार सामने आने से दुनियाभर में बेचैनी फैल गई है। वैसे दक्षिण अफ्रीका में भी एक नए प्रकार का कोरोना वायरस नवंबर के मध्य में सामने आ चुका था। वो वायरस भी उसी तरह से अपने आनुवंशिक रूप में परिवर्तन करता है, जैसा कि इंग्लैंड में सामने आए वायरस में देखा गया है। वैज्ञानिकों को अब इसमें भी दिमाग लगाना पड़ रहा है कि ये जो नए प्रकार के वायरस सामने आ रहे हैं, उनके संक्रमण को कैसे रोका जा सकता है।  

विज्ञापन


हालांकि कोरोना वायरस के इन प्रकारों के सामने आने से वैज्ञानिक चिंतित हैं, लेकिन उन्हें इससे हैरत नहीं हुई है। शोधकर्ता दुनियाभर में कोरोना वायरस में ऐसे हजारों प्रकार के सूक्ष्म परिवर्तन दर्ज कर चुके हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस के अनुवंशिक रूप में परिवर्तन एक आम घटना है। कुछ परिवर्तित प्रकार ज्यादा चर्चित हो जाते हैं और ऐसा होना सिर्फ संयोग होता है। अगर टीकाकरण हुआ हो या मनुष्य के शरीर ने प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ली हो, तो फिर वायरस के ऐसे प्रकार शरीर में ज्यादा समय तक जीवित नहीं रह पाते।


अमेरिका में सिएटल स्थित फ्रेड हचिंसन कैंसर रिसर्च सेंटर में इवोल्यूशनरी बायोलॉजिस्ट जेसी ब्लूम ने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा कि यह एक वास्तविक चेतावनी है, जिस पर हमें बारीकी से ध्यान रखना चाहिए। ऐसे आनुवंशिक परिवर्तन फैलेंगे, इसमें कोई शक नहीं है। वैज्ञानिक उस पर निश्चित रूप से नजर रखेंगे। हमें यह देखना होगा कि इनमें से वायरस के किस रूप का क्या असर होता है।
विज्ञापन


ब्रिटिश सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार और संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ मुज सेविक के मुताबिक ब्रिटेन में कोरोना वायरस के आनुवंशिक रूप से परिवर्तित करीब 20 रूप देखने को मिले हैं। ये विभिन्नता इस आधार पर है कि वे मानव कोशिकाओं में प्रवेश के बाद कैसे नजर आते हैं और कैसे कोशिकाओं को प्रभावित करते हैं। ब्रिटेन सरकार के अधिकारियों ने कहा है कि नए वायरस की संक्रमण क्षमता 70 फीसदी ज्यादा है। लेकिन इस जानकारी की अभी प्रयोगशाला में पुष्टि नहीं हुई है।

दक्षिण अफ्रीका में अधिकारी इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि नए वायरस की महामारी को फैलाने में ज्यादा भूमिका नहीं है। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि नए वायरस की संक्रामक क्षमता का अभी पता लगाया जाना बाकी है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी जो वैक्सीन बनाई गई हैं, वे वायरस के नए प्रकार से संक्रमण रोकने में भी प्रभावी होंगे। उनका कहना है कि वैक्सीन को बेअसर करने की क्षमता विकसित करने में वायरस को कई वर्ष का समय लगता है। ब्लूम ने कहा- इस बात को लेकर किसी को चिंतित नहीं होना चाहिए कि एक आनुवंशिक परिवर्तन अचानक सभी प्रकार की इम्युनिटी और एंटीबॉडीज को बेअसर कर देगा। ऐसा होने की एक प्रक्रिया होती है, जिसमें कई वर्ष का समय लगता है। ऐसा तब हो पाता है, जब वायरस के कई आनुवंशिक परिवर्तित रूप इकट्ठा हो जाते हैं। एक परिवर्तन से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।  

वैज्ञानिकों के मुताबिक अन्य सभी वायरसों की तरह कोरोना वायरस का आकार भी बदलता रहता है। उनके कई आनुवंशिक परिवर्तनों से कोई फर्क नहीं पड़ता। मगर कुछ परिवर्तन असर डालते हैं। लंदन स्थित क्वीन मेरी यूनिवर्सिटी में पब्लिक हेल्थ रिसर्चर डॉ. दीप्ति गुरदासानी ने कहा है कि पिछले महीनों के दौरान यह साफ हो गया है कि कोविड-19 वायरस में आनुवंशिक परिवर्तन हो सकता है। आने वाले दिनों में इस वायरस के ऐसे परिवर्तित रूप बहुत आम हो जाएंगे।

लेकिन हाल के कई वैज्ञानिक रिसर्च पेपर्स में कहा गया है कि कोरोना वायरस इस रूप में विकसित हो सकता है, जिससे सिंगल मोनोकोलन एंटीबॉडी की पहचान कठिन हो जाए। इसीलिए किसी व्यक्ति को दो एंटीबॉडी या उपचारात्मक सीरम दिए जाते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इंसान के लिए सौभाग्य की बात यह है कि उसके शरीर का इम्युन सिस्टम वायरस से रक्षा के लिहाज से शक्तिशाली प्रणाली है।

फाइजर-बायोएनटेक और मॉडेरना कंपनियों की वैक्सीन में मानव शरीर में कोरोना वायरस से शरीर में पहुंचने वाले प्रोटीन से बचाव की व्यवस्था है। उन वैक्सीन के प्रभाव से हर व्यक्ति का शरीर बड़ी मात्रा में खास और जटिल प्रकार के एंटीबॉडी निर्मित करता है, जिससे उस प्रोटीन से रक्षा होती है। वैज्ञानिकों की कुल समझ यह है कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कोरोना वायरस के नए प्रकार भेद दें, यह आसान नहीं है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें