सऊदी अरब के सुप्रीम कोर्ट ने श्रीलंका के हिंदू प्रवासी मजदूर अनोझन शिवरासा को इस्लाम और पैगंबर मोहम्मद के अपमान वाले मामले में सुनाई गई मौत की सजा को रद्द कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका के विदेश मंत्रालय, विदेशी रोजगार और पर्यटन मंत्रालय ने बुधवार (14 अक्तूबर) को जारी एक बयान में इस बात की पुष्टि और बताया कि सऊदी अरब के सुप्रीम कोर्ट ने (13 अक्तूबर को) मौत की सजा रद्द कर दी है। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने इस फैसले का स्वागत किया। अपने एक्स हैंडल में पोस्ट में उन्होंने कहा, मैं सऊदी अरब के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा श्रीलंकाई नागरिक अनोझन शिवरासा को दी गई मौत की सजा को रद्द करने के फैसले का स्वागत करता हूं। इससे अनोजन, उनके परिवार और सभी श्रीलंकाई लोगों को बहुत राहत मिली है, जिन्होंने उनके मामले को गहरी चिंता के साथ देखा है। यह धैर्यवान कूटनीति के मूल्य, एक मित्र राष्ट्र की कानूनी प्रक्रियाओं के प्रति सम्मान और उन लोगों के अथक परिश्रम को दर्शाता है जो विदेश में श्रीलंकाई नागरिक के साथ खड़े थे।
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श्रीलंका की कूटनीतिक कोशिशों के बाद मिली राहत
श्रीलंकाई मीडिया और ब्रिटिश आउटलेट्स की रिपोर्ट के अनुसार, कोलंबो की लगातार कूटनीतिक कोशिशों के बाद अनोझन शिवरासा की मौत की सजा टाल दी गई। 'तमिल गार्डियन' ने पांच अक्तूबर को रिपोर्ट किया कि छह तमिल और मुस्लिम सांसदों (वी राधाकृष्णन, जीवन थोंडामन, रऊफ हकीम, रिषाद बथियुदीन, सेल्वम अदाइकलानाथन और शनाकियान रासामानिकम) ने 24 सितंबर को सऊदी विदेश मंत्री को पत्र लिखकर दया की अपील की थी। 'तमिल गार्डियन' की रिपोर्ट के मुताबिक, रमन्ना महा निकाय और अमरापुरा महा निकाय के महानायक थेरो (वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु) और हिंदू धार्मिक नेताओं समेत कई वरिष्ठ बौद्ध नेताओं ने श्रीलंका के राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर इस मामले में तुरंत दखल देने की मांग की थी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब में श्रीलंका के राजदूत उमर लेब्बे अमीर अजवाद ने 8 अक्तूबर को रियाद से 400 किलोमीटर पूर्व में स्थित दम्माम सेंट्रल जेल में अनोझन शिवरासा से मुलाकात की। उन्होंने शिवरासा का हाल-चाल जाना, जिन पर एक हफ्ते पहले जेल में बंद एक कैदी ने उनपर हमला किया था। 'न्यूजवायर' ने बताया कि मौत की सजा टालने का फैसला 11 अक्तूबर को सऊदी सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर किए जाने के बाद आया।
क्या है पूरा मामला?
24 साल के शिवरासा की मुश्किलें जून के आखिर में शुरू हुई। मामला श्रीलंका में एक हिंदू तीर्थयात्रा के दौरान हुई एक घटना की है। यात्रा के दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें एक युवा मुस्लिम व्यक्ति हिंदू तीर्थयात्रियों के पीछे चल रहे कुत्ते को लात मारता हुआ दिख रहा था। इससे यूजर्स के बीच तीखी बहस हो गई। ऑनलाइन बहस के दौरान, एक यूजर ने हिंदू देवता के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां की। इससे शिवरासा ने तमिल भाषा में पैगंबर मोहम्मद के बारे में टिप्पणी कर दी। इसके बाद जल्द ही टिप्पणी हटी दी और माफी मांगते हुए एक वीडियो पोस्ट की।
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हालांकि अनोझन के टिप्पणी हटाने के बाद उसके स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। उनके भाई हमसिदान ने मीडिया को बताया कि श्रीलंका के कुछ लोगों ने सऊदी अरब में उनके एम्प्लॉयर को ईमेल किया, इससे अधिकारियों को इसकी जानकारी मिली। जानकारी के अनुसार, उनके डिवाइस जब्त कर लिए गए और सोशल मीडिया अकाउंट भी डिलीट कर दिए गए। इसके बाद 15 जुलाई को, अल-अहसा क्रिमिनल कोर्ट ने उन्हें फेसबुक कमेंट के लिए पांच साल की जेल और तीन मिलियन सऊदी रियाल (लगभग 7,60,80,405.42 भारतीय रुपए) का जुर्माना लगाया था। बाद में इसे मौत की सजा में बदल दिया गया था।