सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने तेहरान में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की है। इसका उद्देश्य ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच संभावित पूर्ण युद्ध को टालना और क्षेत्रीय तनाव को कम करना है।
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल सोमवार को तेहरान में थे। इस दौरान उन्होंने ईरानी अधिकारियों के साथ बैठकें कीं, ताकि ईरान और इस्राइल तथा अमेरिका के बीच फिर से शुरू हो सकने वाली लड़ाई को टाला जा सके। यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब ईरान के लोग एक पूर्ण युद्ध की वापसी के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। बात दें कि इस्राइल और अमेरिका में होने वाले चुनावों से पहले वहां के नेताओं ने अपनी धमकियों को और तेज कर दिया है, जबकि ईरानी नेता भी कड़ा रुख अपनाए हुए हैं।
मुलाकात का मुख्य उद्देश्य क्या है?
सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और तुर्किये की खुफिया एजेंसी के प्रमुख ने ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों और वार्ताकारों से मुलाकात की। इसका मकसद तेहरान और वाशिंगटन के बीच किसी समझौते की दिशा में आगे बढ़ना था। अधिकारियों ने बताया कि बैठक में यमन में चल रहे युद्ध और ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर किए गए हमलों पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी। ईरान के एक अधिकारी ने भी नाम न छापने की शर्त पर इन प्रतिनिधिमंडलों के पहुंचने की पुष्टि की।
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सऊदी अरब ने एक बयान में कहा कि प्रतिनिधिमंडलों को उम्मीद है कि वे तनाव कम करने, क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ाने और स्थिरता को बढ़ावा देने के तरीके खोज सकेंगे। मंगलवार को इस्राइल में होने वाले चुनावों और तीन नवंबर को अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले फिर से लड़ाई छिड़ने की चिंताएं बनी हुई हैं।
ईरान ने क्या कहा?
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सप्ताहांत में कहा कि तेहरान ने कूटनीति के रास्ते बंद नहीं किए हैं और मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक संदेश पहुंचाए जा रहे हैं। बघाई ने कहा कि लंबे समय से रुकी हुई बातचीत के बावजूद, अमेरिका अभी भी अपनी एकतरफा मांगें थोपने पर अड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि ट्रंप और अमेरिकी अधिकारी बार-बार पूर्ण आत्मसमर्पण जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे ईरान का कोई भी व्यक्ति स्वीकार नहीं करेगा।
इस बीच, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को अपनी चेतावनी दोहराई। उन्होंने खुफिया जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि ईरान या उसके प्रॉक्सी (समर्थित समूह) चुनावों में बाधा डालने के लिए मतदान से पहले हमला कर सकते हैं। एक वीडियो बयान में उन्होंने कहा कि (सेना) बचाव करने और हमला करने, दोनों के लिए तैयार है। उन्होंने आगे कहा कि आपको इतने जोरदार प्रहार झेलने पड़ेंगे, जितने की आप कल्पना भी नहीं कर सकते।