सऊदी अरब ने मार्च के अंत में पहली बार सीधे ईरान पर गुप्त हवाई हमले किए। रिपोर्ट के अनुसार ये कार्रवाई सऊदी क्षेत्र पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के जवाब में की गई। इसके बाद कूटनीतिक बातचीत के साथ दोनों देशों में तनाव कम करने पर सहमति बनी।
सऊदी अरब की वायुसेना ने मार्च के अंत में ईरान पर कई गुप्त हमले किए। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में पश्चिमी और ईरानी अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी समाने आई है। यह पहली बार है जब सऊदी अरब ने सीधे ईरान पर हमला किया है। इससे पता चलता है कि रियाद अब अपनी सुरक्षा के लिए पहले से ज्यादा कड़ा रुख अपना रहा है।
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क्या बोले अधिकारी?
अधिकारियों ने बताया कि ये हमले सऊदी अरब पर हुए हमलों का बदला लेने के लिए किए गए थे। हालांकि, इन हमलों में किन जगहों को निशाना बनाया गया, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने इस पर कोई साफ जवाब नहीं दिया और ईरान की तरफ से भी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
इन हमलों से साफ है कि पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष काफी बढ़ गया है। तनाव को और ज्यादा बढ़ने से रोकने के लिए सऊदी अरब लगातार ईरान के संपर्क में रहा। दोनों देशों के बीच राजदूतों के जरिए बातचीत होती रही। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने ईरान को इन हमलों की जानकारी दी थी। इसके बाद बड़े स्तर पर कूटनीतिक बातचीत हुई। सऊदी अरब ने चेतावनी दी थी कि अगर हमले नहीं रुके तो वह और कड़ी कार्रवाई करेगा। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव कम करने को लेकर एक अनौपचारिक समझौता हुआ।
कब हुआ समझौता?
यह समझौता 7 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम से ठीक एक हफ्ते पहले लागू हुआ था। ईरानी अधिकारियों ने पुष्टि की कि दोनों देश दुश्मनी खत्म करने और आपसी हितों की रक्षा के लिए सहमत हुए हैं।
मार्च के महीने में तनाव काफी बढ़ गया था। 19 मार्च को सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने कहा था कि जरूरत पड़ने पर उनका देश सैन्य कार्रवाई का अधिकार रखता है। इसके तीन दिन बाद सऊदी अरब ने ईरान के सैन्य अताशे और चार दूतावास कर्मचारियों को देश छोड़ने का आदेश दिया था।
कार्रवाई के बाद हमलों में आई भारी गिरावट
आंकड़ों के मुताबिक, 25 से 31 मार्च के बीच सऊदी अरब पर 105 से ज्यादा ड्रोन और मिसाइल हमले हुए थे। समझौते के बाद 1 से 6 अप्रैल के बीच यह संख्या घटकर सिर्फ 25 रह गई। जानकारों का कहना है कि बाद में हुए हमले ईरान के बजाय इराक से किए गए थे। 7-8 अप्रैल को जब फिर से हमले हुए, तो सऊदी अरब ने ईरान और इराक पर जवाबी कार्रवाई पर विचार किया। इस दौरान पाकिस्तान ने भी अपने लड़ाकू विमान तैनात किए थे। इससे पहले संयुक्त अरब अमीरात ने भी ईरान पर गुप्त हमले किए थे।