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पश्चिम एशिया संकट: ईरान ने अमेरिका को दी परमाणु हथियारों की धमकी, शांति प्रस्ताव खारिज होने के बाद बढ़ा तनाव

Wed, 13 May 2026 07:30 AM IST
राकेश कुमार एजेंसी, दुबई/वाशिंगटन

सार

अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि दोबारा हमला हुआ, तो वह परमाणु हथियार बनाने योग्य 90% शुद्धता तक यूरेनियम का संवर्धन करेगा। दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य कार्रवाई शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। पेंटागन के अनुसार, इस युद्ध में अमेरिका अब तक 29 अरब डॉलर करीब ₹2.4 लाख करोड़ खर्च कर चुका है। इसी बीच, कुवैत ने ईरान पर घुसपैठ का आरोप लगाया है और ब्रिटेन ने कई ईरानी संगठनों पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं।

 
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मोजतबा खामेनेई और डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : @अमर उजाला
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विस्तार
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अमेरिका की तरफ से शांति प्रस्ताव पर ईरानी के जवाब को खारिज किए जाने के बाद पश्चिम एशिया में फिर से युद्ध की आहट सुनाई देने लगी है। ईरान ने जहां दोबारा हमला करने पर हथियार बनाने के स्तर पर यूरेनियम के संवर्धन की चेतावनी दी है, वहीं बताया जाता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान के खिलाफ फिर से व्यापक सैन्य कार्रवाई शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
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ईरान के संसदीय प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने मंगलवार को अमेरिका को खुले तौर पर परमाणु हथियारों की धमकी दी। उन्होंने कहा कि अगर उनके देश पर दोबारा हमला होता है तो तेहरान 90 प्रतिशत शुद्धता तक यूरेनियम का संवर्धन कर सकता है। इसे हथियार बनाने लायक माना जाता है। संसदीय राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के प्रवक्ता रेजाई ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, एक और हमले की स्थिति में ईरान के पास उपलब्ध विकल्पों में 90 प्रतिशत यूरेनियम संवर्धन हो सकता है। हम संसद में इसकी समीक्षा करेंगे।

उधर, अमेरिकी सूत्रों ने सीएनएन को बताया कि ईरान के साथ समझौता नहीं हो पाने से ट्रंप प्रशासन में निराशा बढ़ने लगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ वाशिंगटन की सैन्य कार्रवाई को फिर से शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। बाधित वार्ता और परमाणु मुद्दे को सुलझाने के लिए तेहरान का रवैया ट्रंप प्रशासन की नाराजगी का प्रमुख कारण है। ट्रंप ईरान द्वारा रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और इस्लामिक गणराज्य के नेतृत्व में व्याप्त विभाजन की आशंका से भी अधीर हो रहे हैं। ईरान की प्रतिक्रिया ने कई अमेरिकी अधिकारियों को यह सवाल उठाने के लिए बाध्य किया है कि क्या तेहरान गंभीरता से बातचीत में शामिल होने के लिए तैयार है। आगे की कार्रवाई को लेकर ट्रंप प्रशासन के भीतर भी मतभेद उभर आए हैं। सीएनएन के अनुसार, पेंटागन सहित कुछ अधिकारी ईरान पर दबाव बनाने के लिए लक्षित सैन्य हमलों के माध्यम से अधिक आक्रामक दृष्टिकोण अपनाने की वकालत कर रहे हैं, जबकि प्रशासन के अन्य अधिकारी राजनयिक प्रयासों को और समय देने पर जोर दे रहे हैं।
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यूरेनियम संवर्धन पर अटकी वार्ता
ईरान के पास लगभग 400 किलोग्राम यूरेनियम है जिसे 60 प्रतिशत तक संवर्धित किया जा चुका है। इसे 90 प्रतिशत तक संवर्धित किया जा सकता है। यानी, इस यूरेनियम को परमाणु हथियार बनाने के स्तर तक शुद्ध किया जा सकता है। अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु का संवर्धन पूरी तरह रोक दे, जिसके लिए ईरान तैयार नहीं है।

कुवैत ने हमले के लिए सशस्त्र दल भेजने का आरोप लगाया
कुवैत ने ईरान पर अपने एक द्वीप पर हमला करने के लिए सशस्त्र रिवोल्यूशनरी गार्ड का एक दल भेजने का आरोप लगाया है। उसने दावा किया कि गार्ड के छह सशस्त्र सदस्यों के एक दल ने इराक और ईरान के निकट फारस की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित बुबियान द्वीप में घुसपैठ करने की कोशिश की। इनमें चार लोगों को हिरासत में ले लिया गया जबकि दो भाग गए। हमले में कुवैत का एक सुरक्षा अधिकारी घायल हो गया।

ब्रिटेन ने ईरानी संगठनों व व्यक्तियों पर लगाए नए प्रतिबंध
ब्रिटेन ने अपनी धरती पर शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोप में ईरानी संगठनों और व्यक्तियों को प्रतिबंधित किया है। ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल एवं विकास कार्यालय (एफसीडीओ) ने कहा कि सोमवार को घोषित ये नए उपाय वैश्विक सुरक्षा के खिलाफ ईरानी कार्रवाई और विदेशों में धमकियां देने के लिए आपराधिक गिरोहों के इस्तेमाल के जवाब में उठाए गए हैं। जिन संस्थाओं को प्रतिबंध के दायरे में लाया गया उनमें बेरेलियन एक्सचेंज, जीसीएम एक्सचेंज और जिंदाश्ती नेटवर्क शामिल हैं। प्रतिबंध सूची में शामिल व्यक्तियों में मंसूर जारिंगहलम, नासिर जारिंगहलम, एक्रेम अब्दुलकेरीम ओज्टुनक, निहात अब्दुल कादिर असान, रजा हामिदिरावरी और नामिक सालिफोव शामिल हैं।

इस्राइल ने यूएई को आयरन डोम बैटरियां और कर्मी भेजे
इस्राइल में अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी ने मंगलवार को कहा कि ईरान युद्ध के दौरान देश की रक्षा के लिए इस्राइल ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को आयरन डोम मिसाइलरोधी बैटरियां और उन्हें संचालित करने के लिए कर्मी भेजे थे। तेल अवीव सम्मेलन में हकाबी ने कहा, मैं अब्राहम समझौते के पहले सदस्य यूएई की सराहना करना चाहूंगा। इसके लाभों को देखिए। इस्राइल ने उनकी मदद के लिए आयरन डोम बैटरियां और उन्हें संचालित करने के लिए कर्मी भेजे हैं। यूएई ने वर्ष 2020 में कूटनीतिक रूप से इस्राइल को मान्यता दी थी।

ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका का खर्च 29 अरब डॉलर पहुंचा : पेंटागन
अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध पर अब तक करीब 29 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। यह आंकड़ा पिछले महीने जारी अनुमान से चार अरब डॉलर अधिक है। पेंटागन ने 29 अप्रैल को कहा था कि उस समय तक युद्ध पर लगभग 25 अरब डॉलर खर्च हुए थे। अब नए आकलन में युद्ध की लागत बढ़कर 29 अरब डॉलर हो गई है।

पेंटागन में नियंत्रक के दायित्व संभाल रहे जूल्स हर्स्ट ने सांसदों को बताया कि नए अनुमान में सैन्य उपकरणों की मरम्मत, उनके प्रतिस्थापन और अभियान संचालन से जुड़ी अतिरिक्त लागत को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि संयुक्त स्टाफ और नियंत्रक की टीम लगातार इस खर्च का आकलन कर रही है। हर्स्ट ने यह जानकारी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और संयुक्त चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन की मौजूदगी में दी। हालांकि पेंटागन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि 29 अरब डॉलर का आंकड़ा किस आधार पर तैयार किया गया है। इससे पहले मार्च में एक सूत्र ने रॉयटर्स को बताया था कि ट्रंप प्रशासन के अनुसार युद्ध के शुरुआती छह दिनों में ही कम से कम 11.3 अरब डॉलर खर्च हो चुके थे।

घरेलू राजनीति में ईरान युद्ध बना बड़ा मुद्दा
ईरान युद्ध का बढ़ता खर्च अमेरिका की घरेलू राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। अमेरिका में छह महीने बाद मध्यावधि चुनाव होने हैं, जिनमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के लिए प्रतिनिधि सभा में बहुमत बचाए रखना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। डेमोक्रेटिक पार्टी इस मुद्दे को महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत से जोड़कर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। जनमत सर्वेक्षणों में डेमोक्रेट्स की स्थिति मजबूत बताई जा रही है और विपक्ष युद्ध पर बढ़ते खर्च को आम लोगों की आर्थिक परेशानियों से जोड़कर प्रचार कर रहा है। उधर, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो अमेरिकी रक्षा बजट पर और दबाव बढ़ सकता है। इससे आर्थिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर ट्रंप प्रशासन के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि दोबारा हमला हुआ, तो वह परमाणु हथियार बनाने योग्य 90% शुद्धता तक यूरेनियम का संवर्धन करेगा। दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य कार्रवाई शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। पेंटागन के अनुसार, इस युद्ध में अमेरिका अब तक 29 अरब डॉलर करीब ₹2.4 लाख करोड़ खर्च कर चुका है। इसी बीच, कुवैत ने ईरान पर घुसपैठ का आरोप लगाया है और ब्रिटेन ने कई ईरानी संगठनों पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं।
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