बुधवार को यमन के हूती कब्जे वाले कई इलाकों में सऊदी हवाई और मिसाइल हमलों की खबर सामने आई। हूती मीडिया के मुताबिक, अकेले होदेदाह में करीब 15 हवाई हमले हुए और दो लोगों की मौत तथा चार के घायल होने की सूचना है। हूतियों ने सऊदी ड्रोन गिराने का दावा भी किया है, जिस पर सऊदी अरब की तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। ये घटनाएं दोनों पक्षों के बीच जारी बढ़ते सैन्य टकराव के बीच हुई हैं।
यमन के हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले पश्चिमी, दक्षिण-पश्चिमी और उत्तरी इलाकों में बुधवार को सऊदी अरब की ओर से हवाई और मिसाइल हमले किए गए। हूती संचालित मीडिया के मुताबिक, लाल सागर से लगे होदेदाह प्रांत में कई जगहों को निशाना बनाया गया। यहां बुधवार को करीब 15 हवाई हमले किए जाने की बात कही गई है। हूती मीडिया के मुताबिक, अल मरावीआ और अल काती इलाकों में दूरसंचार टावरों को निशाना बनाया गया।
विज्ञापन
होदेदाह में सबसे ज्यादा नुकसान
हूती संचालित अल-मसीरा टीवी के मुताबिक, बुधवार को होदेदाह में हुए हमलों में कम से कम दो लोगों की मौत हुई और चार अन्य घायल हुए। यह जानकारी हूती मीडिया की रिपोर्ट के आधार पर सामने आई है। खबर में इन हमलों से हुई अन्य क्षति का कोई विस्तृत आंकड़ा नहीं दिया गया है।
होदेदाह के अलावा किन इलाकों में हमले हुए?
दक्षिण-पश्चिमी ताइज प्रांत में भी सऊदी लड़ाकू विमानों ने कई हवाई हमले किए। हालांकि, तत्काल वहां किसी के हताहत होने या नुकसान की जानकारी नहीं दी गई। उत्तरी सादा प्रांत में अद धाहिर जिले में भी सऊदी मिसाइल हमलों की खबर है। बाद में हयदान और मरान इलाकों को भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई, लेकिन वहां तत्काल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं थी।
हूती विद्रोहियों ने सऊदी ड्रोन को लेकर क्या दावा?
ताइज में हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक बयान में दावा किया कि हूती बलों ने लाल सागर के बंदरगाह शहर मोखा के ऊपर एक सऊदी विंग लूंग-2 सशस्त्र टोही ड्रोन को मार गिराया। सरी के मुताबिक, ड्रोन उस समय कथित तौर पर ‘दुश्मन गतिविधियों’ को अंजाम दे रहा था। उन्होंने कहा कि ड्रोन को ‘उपयुक्त हथियार’ से गिराया गया। सऊदी अरब ने इस दावे पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
यमन का संघर्ष कब शुरू हुआ?
यमन में संघर्ष 2014 के आखिर में शुरू हुआ, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में हस्तक्षेप किया। इसके बाद से सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच टकराव यमन संघर्ष का अहम हिस्सा बना हुआ है। पिछले दिनों हूति विद्रोहियों ने सऊदी की तेल कंपनी अरामको को निशाना बनाया था, अब इस हमले को सऊदी की जवाबी कार्रवाई माना जा रहा है।