अमेरिकी धमकियों के बीच उपग्रह तस्वीरों में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हलचल देखने को मिली है। ऐसे में सवाल ये खड़ा हो रहा है कि क्या ईरान कुछ बड़ा करने की योजना बना रहा है? क्या देश में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शन के बीच तेहरान कुछ छुपा रहा है? क्या तेहरान अपनी न्यूक्लियर तैयारी फिर से तेज कर रहा है, या केवल नुकसान का आकलन कर रहा है?
ईरान में पिछले कुछ समय से बड़े पैमाने पर प्रदर्शन चल रहे हैं। पहले जहां लोग महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे, लेकिन अब वहीं विरोध सरकार के खिलाफ राजनीतिक मांगों तक पहुंच गया है। सरकार की सख्ती और दखल के बाद भी ईरान में विरोध प्रदर्शन, मौतों के आंकड़े और हालात को लेकर दुनियाभर में सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच अब ऐसा लग रहा है कि ईरान में नया राजनीतिक और सुरक्षा संकट उभर रहा है। हाल ही में जारी उपग्रह तस्वीरों से पता चला है कि इस्राइल और अमेरिका की तरफ से पिछले साल बमबारी किए गए दो प्रमुख परमाणु स्थलों इस्फहान और नतांज पर अब नई गतिविधियां शुरू हुई हैं।
इस्फहान साइट की इमारत पर भी बनाई गई छत
इसी तरह इस्फहान साइट पर भी इमारत के पास छत बनाई गई है। इस साइट पर पहले सेंट्रीफ्यूज बनाने की सुविधाएं थीं, जिसे इस्राइल ने निशाना बनाया था। उपग्रह तस्वीरों से यह भी पता चलता है कि पहाड़ी में बने कुछ सुरंगों को मिट्टी से भर दिया गया है, जबकि एक सुरंग की दीवारों के पास नई सुरक्षा दीवारें बनाई गई हैं।
क्या कहना है विशेषज्ञों का?
इन तस्वीरों के आधार पर विशेषज्ञों का कहना है कि इन गतिविधियों का उद्देश्य साइट्स पर बचे हुए संसाधनों को छुपाकर बाहर निकालना है, न कि किसी नई सुविधा का निर्माण। हालांकि दूसरी ओर मीडिया रिपोर्टस में दावा यह भी किया जा रहा है कि इन सभी चिजों के अलावा ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और सैन्य साइट्स का पुनर्निर्माण भी कर रहा है। इसके तहत पर्शिन इलाके में 'तालेगान 2' साइट पर हाल ही में निर्माण देखा गया है।
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