G7 की बैठक में PM मोदी
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प्रधानमंत्री ने कहा, ग्लोबल साउथ को दुनिया से बहुत उम्मीदें हैं। उसे सिर्फ मदद नहीं, बल्कि साझेदारी चाहिए। हमें मदद देने और लेने वाली सोच से आगे बढ़कर बराबरी के साझेदार के तौर पर काम करना होगा। हमें सिर्फ एक-दूसरे के साथ-साथ नहीं, बल्कि मिलकर आगे बढ़ना होगा। पीएम मोदी ने कहा, किसी भी साझेदारी का संबंध सम्मान से होना चाहिए, निर्भरता से नहीं।
पीएम मोदी ने कहा, भारत ने हमेशा मानवता सबसे पहले के नजरिए को अपनाया है। यह हमारे इंटरनेशनल सोलर अलाएंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस, मिशन लाइफ और एक पेड़ मां के नाम जैसी पहलों में दिखता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के बारे में भारत का नजरिया वसुधैव कुटुंबकम की सदियों पुरानी सोच पर आधारित है।
G7 की बैठक में PM मोदी
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जी7 बैठक का यह सत्र नई पार्टनरशिप बनाना और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को फिर से मजबूत करना विषय पर आधारित था। इस सत्र में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलनी, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर समेत कई नेताओं ने हिस्सा लिया।
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भारत की कोशिशें अफ्रीका को मजबूत कर रहीं
भारत का मानना है कि साझेदारी की असली कसौटी यह नहीं है कि हम दूसरों के लिए क्या बनाते हैं, बल्कि यह है कि हम उन्हें खुद के लिए कुछ बनाने में कैसे सक्षम बनाते हैं। हमारी विकास साझेदारियां इसी भावना को दर्शाती हैं। हमारी कोशिशें सहयोगी देशों में क्षमता निर्माण और कौशल विकास पर केंद्रित रही हैं। प्रधानमंत्री ने इसके लिए अफ्रीका का उदाहरण दिया और कहा, अफ्रीका में भारत की साझेदारी में ट्रेनिंग, क्षमता निर्माण, जल संसाधन, कृषि और ऊर्जा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। ये कोशिशें अफ्रीकी देशों की क्षमता को मजबूत कर रही हैं और उन्हें दुनिया की अहम चुनौतियों का समाधान खोजने में मदद कर रही हैं।