अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में रूस पर अपना रुख और सख्त किया है। उन्होंने कहा कि अगर युद्ध लंबा खिंचा तो अमेरिका दूसरे चरण के प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार है। इसी बीच कई अमेरिकी सीनेटर ने भी यूक्रेन में युद्ध रोकने के लिए रूस पर कड़े प्रतिबंध और टैरिफ लगाने की मांग की है।
अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा है कि रूस को यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए मजबूर करने का सबसे बड़ा तरीका सख्त प्रतिबंध और टैरिफ लगाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया को अब कदम उठाना होगा और इसमें अमेरिका को नेतृत्व करना चाहिए। उन्होंने शनिवार को कहा कि वह और सांसद ब्रायन फिट्जपैट्रिक एक नया कानून लाने जा रहे हैं, जिसके जरिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार मिलेगा, जो रूस का समर्थन कर रहे हैं। इनमें चीन, भारत और ब्राजील का नाम शामिल है।
चीन पर भी आर्थिक दंड लगाने की मांग
लिंडसे ग्राहम ने आगे कहा कि चीन सस्ते दामों पर रूस का तेल और गैस खरीदकर 'पुतिन की युद्ध मशीन' को चला रहा है। उन्होंने मांग की कि अमेरिका और उसके नाटो सहयोगी देशों को मिलकर चीन पर कड़े आर्थिक दंड लगाने चाहिए। दोनों सांसद चाहते हैं कि यह प्रस्तावित कानून जल्द ही अमेरिकी कांग्रेस में पास हो और इसे आगामी बजट प्रस्ताव के साथ जोड़ा जाए। लिंडसे ग्राहम के अनुसार, यह अमेरिका और उसके सहयोगियों की संकल्प शक्ति की परीक्षा होगी।
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राष्ट्रपति ट्रंप ने भी नाटो देशों से की थी अपील
इससे पहले, राष्ट्रपति ट्रंप ने नाटो देशों से अपील की थी कि वे तुरंत रूस से तेल खरीदना बंद करें और रूस के खिलाफ बड़े पैमाने पर संकट लगाएं। ट्रंप ने कहा था कि अगर नाटो देश सामूहिक रूप से कार्रवाई करने पर सहमत होते हैं, तो अमेरिका भी बड़े कदम उठाएगा। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी प्रस्ताव दिया कि चीन से आने वाले सामान पर 50 से 100 प्रतिशत तक के टैरिफ लगाए जाएं और यह तब तक जारी रहें जब तक यूक्रेन युद्ध खत्म नहीं हो जाता।
'पुतिन को शांति वार्ता की टेबल पर लाना अहम'
लिंडसे ग्राहम और ब्रायन फिट्जपैट्रिक का मानना है कि सख्त प्रतिबंध, ऊंचे टैरिफ और यूक्रेन को उन्नत अमेरिकी हथियारों की आपूर्ति- ये तीन कदम मिलकर पुतिन को शांति वार्ता की टेबल तक लाने में अहम भूमिका निभाएंगे। ग्राहम ने चेतावनी दी, 'समय बहुत कम बचा है। यह सिर्फ नीतियों का मामला नहीं है, बल्कि हमारे संकल्प की परीक्षा है। दुनिया को कदम उठाना होगा और इसमें अमेरिका को आगे रहना होगा।'