भारतीय ओवरसीज कांग्रेस के चेयरमैन सैम पित्रोदा ने अमेरिका में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के हालिया कार्यक्रम और उनके 'मानवता की एकता' वाले बयान पर सवाल उठाए हैं। पित्रोदा ने कहा कि केवल बयान देने से बात नहीं बनती, बल्कि किसी विचार की असली परीक्षा उसके अमल में होती है।
मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित 'वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी' कार्यक्रम में कहा था कि अलग-अलग धर्म भले ही अलग रास्तों पर चलते हों, लेकिन मानवता और सत्य एक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हर इंसान की गरिमा समान है। भागवत के इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पित्रोदा ने कहा कि भारत में मुस्लिम, ईसाई, यहूदी और बौद्ध समुदाय के लोगों से पूछा जाना चाहिए कि वे मौजूदा हालात को किस तरह देखते हैं। पित्रोदा ने कहा कि एक तरफ सभी का सम्मान करने की बात कही जाती है और दूसरी तरफ किसी के साथ मारपीट की घटनाएं होती हैं। उनके मुताबिक, ‘बातों से ज्यादा काम मायने रखता है।’
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत अपने संगठन के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क अभियान के तहत अमेरिका पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने भारतीय प्रवासियों, भारतीय-अमेरिकी कारोबारियों और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। न्यूयॉर्क में उनके कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विरोध भी देखने को मिला। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने भागवत की यात्रा का विरोध किया था। कुछ नगर परिषद सदस्यों ने भी कार्यक्रम स्थल पर आयोजन रद्द करने की मांग की थी।
हल्द्वानी में शुद्धिकरण विवाद को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR पर भी पित्रोदा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस नेता की तारीफ करते हुए राहुल गांधी को मजबूत और दृढ़ नेता बताया। पित्रोदा ने दावा किया कि देश की संस्थाओं में सत्ता के अत्यधिक केंद्रीकरण का असर पड़ा है। उन्होंने न्यायपालिका, चुनाव आयोग, प्रवर्तन निदेशालय और स्थानीय पुलिस समेत कई संस्थाओं की स्वतंत्र भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। पित्रोदा ने हाल में संपन्न संसद के मानसून सत्र को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि संसद में बहस के दौरान कई बार एक-दूसरे पर चिल्लाने की स्थिति दिखाई देती है। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के प्रदर्शन की तारीफ करते हुए कहा कि सरकार कई मुद्दों पर दबाव में नजर आई।
भारत की वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 फीसदी वास्तविक जीडीपी वृद्धि के आंकड़ों पर भी सैम पित्रोदा ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास का आकलन केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि इस आधार पर भी होना चाहिए कि उसका फायदा आम लोगों तक कितना पहुंचा। पित्रोदा ने पूछा कि क्या यह वृद्धि देश के लोगों के लिए है या इसका लाभ केवल कुछ लोगों तक सीमित है। उन्होंने महंगाई का जिक्र करते हुए पेट्रोल, गैस, भोजन और किराये की बढ़ती लागत पर भी सवाल उठाया।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही। इसी अवधि में वास्तविक GVA में 8.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। पहली तिमाही की वास्तविक जीडीपी 81.36 लाख करोड़ रुपये आंकी गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 75.46 लाख करोड़ रुपये थी। मौजूदा कीमतों पर नाममात्र जीडीपी 88.27 लाख करोड़ रुपये रही, जिसमें 10.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
पित्रोदा ने आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि दुनिया को केवल सत्ता और मुनाफे पर ध्यान देने के बजाय लोगों और पर्यावरण को केंद्र में रखना चाहिए। नेपाल में आई बाढ़ का जिक्र करते हुए उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में सड़क और बांध जैसी परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभावों पर सवाल उठाया और पूछा कि क्या ऐसी परियोजनाओं से पहले पर्याप्त पर्यावरणीय अध्ययन किए गए हैं।