अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में प्रख्यात लेखक सलमान रुश्दी पर इस साल अगस्त माह में हमला किया गया था। रुश्दी एक साहित्यिक कार्यक्रम के मंच पर थे, तभी एक शख्स ने उनके गर्दन, धड़ और शरीर के अन्य कई बार चाकू से हमला किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, अब इस मामले उनसे जुड़े एक शख्स ने कथित तौर पर खुलाया किया है कि इस हमले के बाद रुश्दी ने एक आंख की रोशनी खो दी थी और उनके एक हाथ ने भी काम करना बंद कर दिया था।
न्यूयॉर्क में साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान हुआ था हमला
भारतीय मूल के ब्रिटिश लेखक रुश्दी को अपने चर्चित उपन्यास 'द सैनेटिक वर्सेज' (शैतानी आयतें) के लिए जान से मारने की धमकियां मिलती रही हैं। रुश्दी पर न्यूयॉर्क में आयोजित कार्यक्रम में करीब 12 बार चाकू से हमला किया गया था। रुश्दी के साहित्यिक एजेंट माने जाने वाले एंड्रयू वाइली ने एक स्पेनिश समाचार पत्र को बताया कि 75 वर्षीय लेखक को गंभीर चोटें आईं थीं और उन्होंने एक आंख की रोशनी खो दी थी। उनके गले में तीन गहरे घाव थे।
रुश्दी के सीने से धड़ तक लगभग पंद्रह घाव
रिपोर्ट के मुताबिक वाइली ने कहा, "उनका एक हाथ अक्षम हो गया है, क्योंकि उसकी बांह से नसें कट गई हैं और सीने से धड़ तक लगभग पंद्रह और घाव हैं। यह एक क्रूर हमला था।" हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया है कि रुश्दी अभी अस्पताल में भर्ती हैं या नहीं।
रुश्दी के सिर पर रहा कई वर्षों तक इनाम
रुश्दी का जन्म मुंबई में एक मुस्लिम कश्मीरी परिवार में हुआ था। 'द सैनेटिक वर्सेज' उनका चौथा उपन्यास है, जिसे 1988 में जारी किया गया था। शायद यह उनका सबसे विवादास्पद उपान्यास रहा है। कई वर्षों तक उनके सिर पर इनाम रखा गया था। ब्रिटिश पुलिस की सुरक्षा में उन्होंने नौ साल अंडरग्राउंड बिताए थे।
ईरान के सर्वोच्च नेता ने जारी किया था मौत का फतवा
'द सैनेटिक वर्सेज' के प्रकाशन के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी ने 1989 में फतवा जारी कर रुश्दी की मौत का आह्वान किया था। न्यूयॉर्क में उन पर हमला करने वाले शख्स की पहचान चौबीस वर्षीय हादी मटर के रूप में की गई। हालांकि, ईरान ने हमलावर के साथ किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया।