बुकर पुरस्कार से सम्मानित और भारतीय मूल के लेखक सलमान रुश्दी करीब नौ महीने बाद सार्वजनिक रूप से सामने आए। दरअसल, पिछले साल अगस्त में रुश्दी पर न्यूयॉर्क में चाकू से हमला किया गया था। हमलावर ने उनकी गर्दन, हाथ और पेट पर चाकू से वार किए थे। इस घटना में उनकी एक आंख की रोशनी भी चली गई। घातक हमले के बाद गुरुवार को पहली बार वह न्यूयॉर्क शहर में पेन अमेरिका के वार्षिक समारोह में शामिल हुए।
मैनहट्टन में स्थित अमेरिकन म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के 2023 लिटरेरी गाला में शामिल होकर 75 वर्षीय रुश्दी ने सबको चौंका दिया। दरअसल, उनके कार्यक्रम में शामिल होने की किसी भी तरह की कोई घोषणा नहीं की गई थी। इस दौरान, पेन अमेरिका ने भारत में जन्मे लेखक को पेन सेंटेनरी करेज अवार्ड से सम्मानित किया।
मुझे खुशी है कि जिंदगी ने इस तरह मोड़ लिया
रुश्दी ने दर्शकों की तालियों की गूंज के बीच सभी का अभिवादन किया और कहा कि वापस नहीं आने का मेरे पास विकल्प था। लेकिन मुझे वापस आकर अच्छा लग रहा है। मुझे खुशी है कि जिंदगी ने इस तरह मोड़ लिया है। उन्होंने कहा कि पेन अमेरिका के साथ मेरा एक लंबा जुड़ाव है। मैं लेखकों के बीच वापस आकर बहुत खुश हूं।
20 सेकंड में कई वार हमला
बताया जाता है कि हमलावर ने 20 सेकंड में कई वार किए थे। हमले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता था कि घटना के बाद स्टेज पर काफी खून बिखरा पड़ा दिखाई दिया था। वहां मौजूद लोगों ने हमलावर को पकड़ लिया था। बाद में उसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया गया। हमला इतने खतरनाक तरीके से किया गया था कि लेखक को अपनी एक आंख की रोशनी खोनी पड़ी।
आप नहीं होते तो मैं...
मुंबई में एक कश्मीरी परिवार में पैदा हुए रुश्दी ने मंच पर मौजूद लोगों और डॉक्टरों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को हमें बढ़ावा नहीं देना चाहिए। हिंसा से हमें नहीं डरना चाहिए। संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अगर आप लोग नहीं होते, तो मैं निश्चित रूप से आज यहां खड़ा नहीं होता। उस दिन मैं निशाने पर था, लेकिन वे नायक थे। साहस, उस दिन सब उनका था। मैं अपने जीवन के लिए उनका एहसानमंद हूं।
वहीं, पेन अमेरिका ने एक बयान जारी कर कहा कि रुश्दी की वापसी हम सभी के लिए भावनात्मक थी।