विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार को तंजानिया में चीन पर निशाना साधते हुए कहा, दूसरे देशों की तरह भारत का मकसद अफ्रीका के प्राकृतिक खजाने को लूटना नहीं है। भारत दोहन करने वाली अर्थव्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा, भारत तमाम अफ्रीका देशों को बढ़ता देखना चाहता है। अफ्रीका के प्रति भारत का दृष्टिकोण अफ्रीका के साथ अधिक व्यापार करना, अफ्रीका में निवेश करना, अफ्रीका के साथ काम करना, क्षमताएं पैदा करना है, ताकि जिस तरह से एशिया में भारत जैसे देश तरक्की कर रहे हैं, अफ्रीका भी उस राह पर चल सके।
जयशंकर ने कहा, अफ्रीकी देशों के साथ भारत एक शोषणकारी आर्थिक संबंध नहीं चाहता, जैसा कि कुछ देश यहां अपने बेहद संकीर्ण आर्थिक हितों को पूरा करने के में जुटे हैं। बल्कि, भारत व्यापक और गहरी साझेदारी चाहता है, जिससे अफ्रीकी देशों और लोगों को लाभ मिले। पांच जुलाई को चार दिन के तंजानिया दौरे पर गए जयशंकर बृहस्पतिवार को दार-अस-सलाम पहुंचे। इस दौरान उन्होंने भारतीय समुदाय के साथ बातचीत की, जिसकी जानकारी ट्विटर पर देते हुए उन्होंने कहा, भारत और तंजानिया के संबंध साझा हितों पर टिके हैं। भारतीय समुदाय इस रिश्ते को मजबूत कर रहा है। एजेंसी
तेजी से बढ़ेगा अफ्रीका के साथ कारोबार
विदेश मंत्री ने कहा, वे आने वाले दशकों में भारत-अफ्रीका के बीच मौजूदा 95 अरब डॉलर का कारोबार कई गुना बढ़ जाएगा। इसके तीन कारण हैं, एक तो तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था, दूसरा, अफ्रीका में मांग व तीसरा तकनीक। उन्होंने कहा, एक तरफ भारतीय व्यवसाय तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं अफ्रीका में मांग बढ़ रही है। यह हम पर निर्भर करता है कि अफ्रीका की मांग पूरी कर पाते हैं या नहीं। हमें चीन, यूरोप और तुर्की के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी। इसके अलावा तकनीक क्षेत्र भारत को अफ्रीकी सरकारों के साथ सहजता से जोड़ता है।
80 लाख लोगों को पीने का पानी पहुंचाएगा भारत
जयशंकर ने कहा, आज दुनिया भारत को एक योगदानकर्ता के रूप में देखती है। इसी क्रम में भारत की मदद से जंजीबार के किदुतानी में एक जल परियोजना पूरी की गई है। इससे 80 लाख लोगों को पीने का पानी मिलेगा। तंजानिया में रहने वाले, तंजानिया में काम करने वाले भारतीय समुदाय के लोग यहां अपना सिर गर्व से ऊंचा उठा सकते हैं।
तंजानिया में क्षमता निर्माण में भारत भागीदार
जयशंकर ने प्रवासी भारतीय समुदाय को अफ्रीकी देशों के साथ भारत के रिश्तों का मजबूत पुल बताते हुए कहा, तंजानिया में भारत क्षमता निर्माण के लिए 750 छात्रवृत्तियां दे रहा है। इनमें से तंजानिया सरकार को उनके उपयोग के लिए 450 छात्रवृत्तियां दी गई हैं। इसके अलावा पारंपरिक विनिमय कार्यक्रम आईटेक के तहत रक्षा प्रशिक्षण के लिए 240 और शिक्षा आदान-प्रदान के तहत 70 छात्रवृत्तियां दी गई हैं।
भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि
जयशंकर ने कॉमनवेल्थ युद्ध स्मारक पर भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, प्रथम विश्व युद्ध दोनों देशों के साझे इतिहास का अहम हिस्सा है। युद्ध में ब्रिटिश सेना में शामिल भारतीय भी यहां लड़े थे। 1917 में 14 भारतीय सैनिक यहां शहीद हुए थे। विदेश मंत्री ने कहा दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे जुड़ाव के साथ ही राजनीतिक, आर्थिक और संसदीय संबंध सराहनीय हैं। पूरी उम्मीद है कि मजबूत ऐतिहासिक संसदीय लोकतंत्र का संबंध समय के साथ और गहरा होगा।