प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ह्यूस्टन के कार्यक्रम हाउडी मोदी में भारतीय अमेरिकियों को संबोधित करते हुए 'अबकी बार ट्रंप सरकार' का नारा दिया था। इसपर विदेश मंत्री एस जयशंकर का कहना है कि वह महज संदर्भ था जो डोनाल्ड ट्रंप ने अपने राष्ट्रपति चुनाव प्रचार अभियान के दौरान भारतीय-अमेरिकी समुदाय का प्यार हासिल करने के लिए कहा था। उन्होंने इस बात को दोहराया कि अमेरिका की घरेलू राजनीतिक की तरफ भारत का रुख गैर पक्षपाती है।
अपनी तीन दिनों की यात्रा पर वाशिंगटन पहुंचे जयशंकर ने इस बात को सिरे से नकार दिया कि प्रधानमंत्री ने 2020 के चुनाव अभियान के लिए ट्रंप की उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए ऐसा कहा था। ह्यूस्टन रैली में मोदी द्वारा इस्तेमाल किए गए नारे के भविष्य पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में भारतीय पत्रकारों के सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा, ‘नहीं, उन्होंने ऐसा नहीं कहा था।’
विदेश मंत्री ने कहा, ‘मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री ने जो कहा, उस पर कृपया सावधानीपूर्वक ध्यान दें। मेरी याददाश्त के मुताबिक प्रधानमंत्री ने जो कहा वह ट्रंप ने इस्तेमाल किया था तो प्रधानमंत्री पहले की बात कर रहे थे। मुझे नहीं लगता कि हमें बातों का गलत अर्थ निकालना चाहिए। मुझे नहीं लगता कि ऐसा करके आप किसी के लिए अच्छा कर रहे हैं।’
गौरतलब है कि 22 सितंबर को ह्यूस्टन में 50,000 से अधिक भारतीय अमेरिकियों के जनसमूह को संबोधित करते मोदी ने कहा था, ‘उम्मीदवार ट्रंप के ‘अबकी बार ट्रंप सरकार’ शब्दों की गूंज ऊंची और स्पष्ट है।’
जयशंकर ने पत्रकारों से सटीक रिपोर्ट देने का अनुरोध करते हुए कहा, ‘मेरा मतलब है कि वह (मोदी) जो बात कर रहे थे उसके बारे में काफी स्पष्ट थे। वह जो कह रहे थे, वह वही है जो उम्मीदवार के तौर पर कहा गया था, जो दिखाता है कि आप उम्मीदवार के तौर पर भी भारत और उसके लोगों से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। हमारा अमेरिका की घरेलू राजनीति की ओर गैर-पक्षपाती रुख रहा है। हमारा रुख यही है कि इस देश में जो भी होता है वह उनकी राजनीति है, न कि हमारी।'
जयशंकर ने भारत को पाकिस्तान के साथ जोड़ने की कोशिशों पर उठाए सवाल
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद भारत और पाकिस्तान को साथ जोड़ने की कोशिशों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा वे लोग कर रहे हैं जिनके दिमाग पर जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त किए जाने का घटनाक्रम हावी है।
जयशंकर ने भारतीय संवाददाताओं से कहा, ‘आप एक ऐसे देश को कैसे साथ जोड़कर देख सकते हो, जो आपकी अर्थव्यवस्था का आठवां हिस्सा है... जो छवि के हिसाब से आपसे एकदम विपरीत है?’ उन्होंने कहा कि इस तर्क से तो भारत को ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए जिससे किसी भी बातचीत में पाकिस्तान आए। जयशंकर ने कहा कि इसलिए, अफगानिस्तान के बारे में बात नहीं कीजिए, बल्कि दक्षिण एशिया की भी बात नहीं कीजिए। मुझे लगता है कि लोगों के दिमाग पर यह हावी हो गया है।