भारत के लिए नवनियुक्त रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा है कि S-400 मिसाइल सिस्टम की खरीदी भारत के सुरक्षा हितों में है। उन्होंने यह भी इस खरीदी को लेकर अमेरिका द्वारा भारत पर पाबंदी की धमकी का भारत-रूस सैन्य संबंधों पर कोई असर नहीं होगा।
भारत ने एस-400 मिसाइल सिस्टम खरीदने के लिए रूस से अक्तूबर 2018 में 5.43 अरब डॉलर का करार किया था। इसे लेकर अमेरिका भारत को बार-बार चेता रहा है कि वह यह करार खत्म करे। उसका कहना है कि इससे अमेरिका विरोधी देशों के खिलाफ पाबंदी संबंधी कानून (CAATSA) का उल्लंघन हो सकता है।
भारत में नियुक्त रूसी राजदूत अलीपोव ने कहा, 'अमेरिका द्वारा भारत के खिलाफ पाबंदियों की धमकियों का अब तक हमने कोई असर नहीं देखा है। मेरा अनुमान है कि उनका कोई असर नहीं होगा।' रूसी समाचार एजेंसी स्पूतनिक के साथ चर्चा में एलीपोव ने भारत-रूस के बीच सैन्य-तकनीकी सहयोग पर टिप्पणी करते हुए यह बात कही।
भारत ने पहली खेप की तैनाती शुरू की
पिछले माह भारत ने एस-400 सिस्टम की पहली रेजीमेंट की तैनाती शुरू कर दी। जमीन से हवा में मार करने वाली इस मिसाइल की पहली इकाई अप्रैल में काम करने में सक्षम हो जाएगी। स्पूतनिक के अनुसार अमेरिकी विदेश विभाग ने इसके जवाब में कहा था कि वह इस एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर पाबंदियां लगाने की संभावना के बारे में भारत के संपर्क में है।
रूसी राजदूत ने कहा कि भारत ने बार-बार कहा था कि रूस के साथ एस-400 खरीद सौदा उसकी सुरक्षा के हित में है। भारत एक स्वतंत्र विदेश नीति अपनाता है और उस पर डाले जा रहे दबाव को रूस नकारात्मक मानता है। अलीपोव ने कहा, 'एस-400 डील हम दोनों देशों का करार है। इसमें कोई और देश शामिल नहीं हो सकता। इसलिए, यह मानने का कोई कारण नहीं है कि भविष्य में भारतीय स्थिति बदलेगी। इस परियोजना को क्रियान्वित किया जा रहा है।
क्या है काट्सा कानून
काट्सा या CAATSA कानून के जरिए अमेरिका ईरान, उत्तर कोरिया और रूस पर प्रतिबंध लगाता है। यह कानून अमेरिका के विरोधी देशों पर प्रतिबंध का अधिनियम CAATSA कहलाता है। इसके तहत अमेरिकी प्रशासन को उन देशों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार है। यह कानून रूस द्वारा 2014 में क्रीमिया के कब्जे और 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में उसके कथित हस्तक्षेप के जवाब में बनाया गया है। यह उन देशों पर भी लागू होता है, जो रूस से हथियार या रक्षा सामान खरीदते हैं।