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रूस : संविधान में संशोधन के सहारे फिर राष्ट्रपति बनने की जुगत भिड़ा रहे पुतिन

Mon, 22 Jun 2020 07:27 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को

सार

  • राष्ट्रपति के रूप में एक और कार्यकाल बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं पुतिन
  • रूस में संविधान संशोधन को लेकर 25 जून से एक जुलाई तक होगा मतदान 
  • संशोधन पारित होने पर पुतिन को दो और कार्यकाल की मिलेगी अनुमति
  • विपक्ष ने प्रस्ताव पर उठाए सवाल, संसद-न्यायालय से मिल चुकी अनुमति
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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16 साल से रूस के राष्ट्रपति पद पर आसीन व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि अगर मतदाता संवैधानिक बदलाव को अनुमति देते हैं तो वह एक और कार्यकाल पर विचार कर सकते हैं। पुतिन का कार्यकाल साल 2024 में समाप्त होगा। इस सांविधानिक बदलाव को लेकर रूस में 25 जून से एक जुलाई तक मतदान होगा। 

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रूस की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक साक्षात्कार में पुतिन ने कहा कि अगर मतदाता संवैधानिक संशोधन को मंजूरी देते हैं तो वह राष्ट्रपति के रूप में एक और कार्यकाल बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। यह संशोधन अगर पारित हो जाता है तो पुतिन को दो और कार्यकाल यानी साल 2036 तक के लिए राष्ट्रपति बने रहने की अनुमति मिल जाएगी। 

वहीं, इस मामले में विपक्ष का कहना है कि यह संविधान में संशोधन का यह प्रस्ताव पुतिन को साल 2036 कर सत्ता में बनाए रखने के लिए तैयार किया गया है। इस संशोधन के पारित होने की स्थिति में पुतिन का राष्ट्रपति के रूप में अब तक का कार्यकाल शून्य मान लिया जाएगा और वह दोबारा राष्ट्रपति बन सकेंगे। 
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बता दें कि व्लादिमीर पुतिन पहली बार सात मई 2000 को रूस के राष्ट्रपति बने थे। उनका यह कार्यकाल साल 2008 में पुरा हुआ था, जिसके बाद दिमित्री मेदवेदेव राष्ट्रपति चुने गए थे। इस दौरान पुतिन प्रधानमंत्री की भूमिका में थे। सात मई 2012 को पुतिन फिर राष्ट्रपति चुने गए। तब से वह इस पद पर आसीन हैं। 

15 साल तक रूसी खुफिया एजेंसी केजीबी के जासूस रहे पुतिन को राष्ट्रपति पद पर 16 साल हो गए हैं। अब यहां राष्ट्रपति पद के लिए अगला चुनाव साल 2024 में होना है। देश के मौजूदा कानून के अनुसार वह अगला चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। इस बाध्यता को समाप्त करने के लिए ही संविधान में संशोधन की पहल की जा रही है। 

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