अमेरिका का अगला राष्ट्रपति कौन बनेगा, रूस के राष्ट्रपति ने इसकी उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का अगला नेता अधिक रचनात्मक होगा। व्हाइट हाउस को अब बातचीत के महत्व को समझना चाहिए। क्रेमलिन प्रवक्ता ने कहा कि पुतिन किसी भी व्यक्ति के साथ काम करने के लिए तैयार हैं, जो यह समझे कि रूस को लेकर सावधान होने की आवश्यकता है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि वह एक ही दिन में रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कर सकते हैं, यह सरासर गलत है। अमेरिका यूक्रेन को धन दे रहा है, यह खतरनाक है। अमेरिका इस संघर्ष को खींच रहा है। पेसकोव ने साफ किया कि जब तक यूक्रेन में हमारा लक्ष्य पूरा नहीं होगा, तब तक युद्ध खत्म नहीं किया जाएगा। वर्तमान में यूक्रेन में लगभग 6,17,000 रूसी सैनिक हैं, जिनमें से लगभग 244,000 सैनिकों को रूसी सेना के साथ लड़ने के लिए बुलाया गया था। रूसी चुनावों में दखल देने के मामले में पुतिन ने कहा कि रूस के आंतरिक मामलों में किसी भी हस्तक्षेप पर कानूनी कार्रवाई होगी और कड़ी सजा दी जाएगी। हम अपने लोगों की स्वतंत्रता और उनकी संप्रभुता की रक्षा कर रहे हैं। रूस के नागरिक ही हमारी शक्ति के श्रोत हैं।
1999 से सत्ता में बरकरार
71 साल के पुतिन दिसंबर 1999 से सत्ता में बने हुए हैं। वह दिसंबर 1999 में कार्यवाहक राष्ट्रपति बने। इसके बाद 2000 से 2008 तक दो कार्यकाल तक सत्ता में रहे। फिर अपने प्रधानमंत्री दिमित्री मेदवेदेव के साथ नौकरियों की अदला-बदली की, ताकि लगातार राष्ट्रपति जनादेश को दो तक सीमित करने वाले नियमों को दरकिनार किया जा सके, केवल 2012 में क्रेमलिन नेता की भूमिका को पुनः प्राप्त करने के लिए। कार्यकाल की सीमा पुतिन को अगले चुनाव में खड़े होने से अयोग्य घोषित कर देती, लेकिन 2020 में एक विवादास्पद संवैधानिक सुधार ने उनके लिए कम से कम 2036 तक सत्ता में बने रहने का मार्ग प्रशस्त किया।
रूस में अगले साल ब्रिक्स सम्मेलन
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को आयोजित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन रूस के कजान शहर में आयोजित होगा। इस दौरान हम वर्तमान स्थिति को सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे। नियम आधारित विश्व व्यव्सथा वास्तव में अस्तित्व में नहीं है। यह राजनीतिक एजेंडे, हितों और प्रोपोगैंडा के अनुसार हर दिन बदलती रहती है। हम अपने शिखर सम्मेलन में साफ करेंगे कि इसी विश्व में अन्य शक्तिशाली देश हैं, जो नियमों के अनुसार नहीं चलना चाहते। अन्य शक्तिशाली देश मौलिक नीतियों के आधार पर बढ़ना चाहते हैं।