रूस ने बुधवार को ईरानी सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी की हत्या की निंदा की। लारीजानी ने जनवरी में क्रेमलिन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। यह मुलाकात पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती बढ़ने के बीच हुई थी, क्योंकि अगले महीने ईरान पर अमेरिका और इस्राइल के हमले होने वाले थे। मॉस्को टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पत्रकारों से कहा, हम संप्रभु और स्वतंत्र ईरान के नेतृत्व को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से की गई कार्रवाइयों और उससे भी अधिक उनकी हत्या की कड़ी निंदा करते हैं। पेस्कोव ने लारीजानी का नाम नहीं लिया और न ही उनकी मौत के लिए सीधे तौर पर इस्राइल को जिम्मेदार ठहराया।
इससे पहले, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के सर्वोच्च नेता रहे अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की निंदा की थी। उन्होंने इसे एक क्रूर हत्या करार दिया था और कहा था कि यह नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। क्रेमलिन की ओर से ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को संदेश जारी किया गया था, जिसमें राष्ट्रपति पुतिन ने अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर शोक व्यक्त किया था और उनकी प्रशंसा की थी। पुतिन ने कहा था कि खामेनेई ने रूस और ईरान के बीच संबंधों को और मजबूत किया और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने में अहम योगदान दिया।
रिवोल्यूशनरी गार्ड के बॉस थे लारीजानी: नेतन्याहू
इस्राइली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने 17 मार्च 2026 को एक टेलीविजन संबोधन में ईरानी राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी की हत्या की पुष्टि की। उन्होंने कहा, आज सुबह हमने अली लारिजानी को खत्म कर दिया, जो रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के बॉस थे। वह (आईआरजीसी) गिरोहों का गिरोह है जो असल में ईरान चलाता है।
कौन थे लारीजानी?
लारीजानी ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के महासचिव थे। बीते शुक्रवार को तेहरान विश्वविद्यालय के पास फिरदौस चौक पर धमाका हुआ। यहां फलस्तीन के समर्थन में कुद्स दिवस समारोह आयोजित किया गया था, जिसमें हजारों लोग जुटे थे। लारीजानी भी इसमें शामिल हुए थे। अपने संबोधन में इस्राइल व अमेरिका पर जमकर बरस पड़े थे। अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिकी-इस्राइली हमलों में मौत के बाद नेतृत्व में लारीजानी बड़ा चेहरा बनकर उभर रहे थे।
रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था, ईरान पर बमबारी दुश्मन की हताशा है। अमेरिका और इस्राइल को समझना चाहिए कि उनके हमलों से ईरानी जनता डरती नहीं है, बल्कि ये हमले उनको और मजबूत करते हैं। रैली पर हमले ने लोगों को और मजबूत किया है।
लारीजानी की ईरानी शासन में शांत और व्यावहारिक व्यक्ति के रूप में पहचान रही। लेकिन हाल के समय में उनका रुख आक्रामक दिखा था। उन्होंने पश्चिमी देशों के साथ परमाणु समझौतों पर वार्ताओं का नेतृत्व किया था। उन्होंने जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट पर किताबें भी लिखी थीं।
ये भी पढ़ें:
ईरान पर ट्रंप का सख्त रुख: सहयोग न देने वाले सहयोगियों को भी दी चेतावनी, होर्मुज को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
हाल ही में युद्ध में अली खामेनेई और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के कमांडर मोहम्मद पाकपुर की मौत हुई। इसके बाद से लारीजानी (67 वर्षीय) आक्रामक दिखे। जब उन्हें अली खामेनेई के मारे जाने की खबर मिली तो उन्होंने टेलीवजन पर आकर कहा, अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के दिल में आग लगाई है। हम उनके पछताने पर मजबूर कर देंगे।
ईरानी के केनेडी के रूप में क्यों प्रसिद्ध?
लारीजानी को ईरान के केनेडी के रूप में जाना जाता था। वह इराक के नजफ से एक समृद्ध परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनकी रईसी को देखते हुए टाइम पत्रिका ने साल 2009 में उन्हें ईरान का केनेडी बताया था। लारीजानी के पिता मिर्जा हाशेम अमोली अपने दौर के जाने में धार्मिक विद्वान थे, जबकि उनके भाई ईरान में ताकतवर पदों को संभाल चुके थे। उनकी पत्नी का ताल्लुक भी एक प्रभावशाली परिवार से है। वहीं उनकी फातिना ने अमेरिका के प्रसिद्ध क्वींसलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी से अध्ययन किया है।