Russian pipeline leaks: नॉर्ड स्ट्रीम गैस पाइल लाइन
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नॉर्ड स्ट्रीम गैस पाइपलाइनों में तोड़फोड़ किसने की, इसको लेकर अभी भी आरोप-प्रत्यारोपों का दौर जारी है। पश्चिमी खेमे ने इसका दोष रूस पर मढ़ा है, जबकि रूस ने इसके लिए पश्चिमी एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराया है। इन पाइपलाइनों से रूस से बाल्टिक सागर होते हुए यूरोप तक प्राकृतिक गैस पहुंच रही थी।
विशेषज्ञों ने कहा है कि पाइपलाइनों में लीक होने का सच चाहे जो हो, इसके परिणामस्वरूप यूरोप में फिलहाल गंभीर हालत बन गई है। अब यूरोप के लिए अगली सर्दियों में पर्याप्त ऊर्जा का इंतजाम करना कठिन हो गया है। ऑस्ट्रेलियाई वेबसाइट द कन्वर्सेशन में ब्रिटिश यूनिवर्सिटी ऑफ वॉरविक के वैश्विक ऊर्जा विभाग में प्रोफेसर माइकल ब्रैडशॉ ने लिखा है- ‘गैस उपभोक्ताओं के लिए यूरोप में अगली दो सर्दियां चुनौतीपूर्ण होने जा रही हैं। इन उपभोक्ताओं में आम परिवार, कारोबार और औद्योगिक घराने शामिल हैं। लेकिन अभी जो हो रहा है, उसका असर यह होगा कि वैश्विक गैस बाजार में यूरोप की स्थिति बदल जाएगी।’
रूस ने 2021 में यूरोपियन यूनियन (ईयू) के सदस्य देशों की गैस की कुल जरूरत के लगभग 40 फीसदी हिस्से की आपूर्ति की थी। खास कर जर्मनी रूस से मिलने वाली सस्ती गैस पर निर्भर रहा है। जर्मनी अपने 15 फीसदी बिजली उत्पादन के लिए गैस पर निर्भर है। इसके अलावा उसका भारी उद्योग और पेट्रो-केमिकल उद्योग की गैस पर भारी निर्भरता है। पूरे यूरोप में सर्दियों में आम घरों को गर्म रखने के लिए बड़े पैमाने पर प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल किया जाता है।
यूरोपीय मीडिया की रिपोर्टों में बताया गया है कि सर्दी की 80 फीसदी तक मांग को पूरा करने के लिए योग्य गैस यूरोपीय भंडार में मौजूद है। इसके अलावा नॉर्वे, उत्तर अफ्रीका, और अजरबैजान से यूरोपीय देशों ने गैस खरीदने के नए सौदे किए हैं। इसलिए संभव है कि सर्दी के सीजन में यूरोप में वैसी दिक्कत ना हो, जैसा अनुमान अभी लगाया जा रहा है। इसके बावजूद विशेषज्ञों ने राय जताई है कि यूरोप में सर्दी कैसे कटती है, यह काफी कुछ मौसम से तय होगा। अगर मौसम कम ठंडा हुआ या उन दिनों तेज हवाएं चलीं, तो यूरोप आराम की स्थिति में होगा। तेज हवाएं चलने से पवन ऊर्जा का अधिक उत्पादन हो सकेगा।
यूरोप के लिए इसे भी अच्छी बात माना जा रहा है कि चीन में जीरो कोविड नीति के कारण बार-बार लग रहे लॉकडाउन से वहां लिक्विफाइड नैचुरल गैस (एलएनजी) की मांग औसतन 40 फीसदी घटी हुई है। इसलिए बाजार में एलएनजी पर्याप्त मात्रा में मौजूद है। मगर फिलहाल यूरोप की दिक्कत यह है कि वहां एलएनजी रखने का भंडार और एलएनजी के परिवहन की समुद्री जहाजों की क्षमता सीमित है। इसके अलावा अमेरिका से आ रही एलएनजी रूसी गैस की तुलना में महंगी भी पड़ रही है।
कुछ उद्योग संगठनों ने अनुमान लगाया है कि यूरोप एलएनजी आयात की अपनी क्षमता उससे अधिक तेजी से बढ़ा लेगा, जितना अभी तक अनुमान रहा है। विश्लेषकों ने कहा है कि यूरोप ने वैसे भी रूसी गैस से छुटकारा पाने की योजना बनाई थी। नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइनों में लीक का अच्छा असर यह हो सकता है कि ये काम अब जल्दी पूरा हो जाएगा।