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स्विफ्ट सिस्टम से निष्कासन: इस मार से बचने की क्या है रूस की तैयारी?

Mon, 28 Feb 2022 07:21 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को

सार

विशेषज्ञों के मुताबिक रूस हो सकता है चीन के सिप्स (क्रॉस-बॉर्डर इंटरबैंक पेमेंट सिस्टम) का भी इस्तेमाल करे। चीन ने सिप्स को स्विफ्ट के विकल्प के तौर पर बनाया है। लेकिन अभी इसका इस्तेमाल बहुत कम होता है। अब संभावना जताई जा रही है कि चीन के साथ-साथ रूस और अमेरिकी प्रतिबंधों के शिकार अन्य देश इसे अधिक प्रचलन में लाने की कोशिश कर सकते हैं...
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स्विफ्ट सिस्टम - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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अंतरराष्ट्रीय भुगतान के सिस्टम- सोसायटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्यूनिकेशन (स्विफ्ट) निकालने जाने का रूस की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। इस बात से रूस की सरकार भी वाकिफ है। लेकिन रूसी विश्लेषकों का कहना है कि रूस इसके लिए पहले से तैयार था। इसलिए उसने इस निष्कासन की चोट को सीमित रखने के उपाय कर रखे हैं।

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यूक्रेन पर रूसी हमले के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए अमेरिका और यूरोपीय देशों ने कई रूसी बैंकों को स्विफ्ट सिस्टम से बाहर करने का फैसला किया है। इसे देखते हुए रूस के सेंट्रल बैंक- बैंक ऑफ रशिया- ने घरेलू बैंकों को पर्याप्त मात्रा में नकदी उपलब्ध कराने की घोषणा की है। सेंट्रल बैंक ने कहा है कि उसके इस उपाय से देश में वित्तीय स्थिरता बनी रहेगी। बैंक ऑफ रशिया ने इस मकसद से सोमवार को रेपो (री-परचेज समझौते) नीलामी शुरू की। उसने कहा कि इस दौरान बैंक जितनी नकदी के लिए अर्जी देंगे, उतनी उन्हें उपलब्ध कराई जाएगी।

ब्याज दर में भारी वृद्धि

इसी बीच सोमवार को बैंक ऑफ रशिया ने देश में ब्याज दर में भारी वृद्धि कर दी। अब रूस में ब्याज दर 20 फीसदी होगी। इसका मकसद रूसी नागरिकों को अपना धन बैंकों में जमा कराने के लिए प्रोत्साहित करना है। बैंक ने यह भी एलान किया कि अब विदेशी मुद्रा में प्राप्त होने वाली अपनी आमदनी के 80 फीसदी हिस्से का विनिमय रूसी नागरिकों को करना होगा। यानी 80 फीसदी विदेशी मुद्रा जमा करा कर उन्हें उसके बदले उन्हें रुबल (रूसी मुद्रा) लेनी होगी।

बैंक ऑफ रशिया ने कुछ वर्ष पहले स्विफ्ट जैसा अपना सिस्टम तैयार किया था। इसका नाम फाइनेंशियल मैसेज ट्रांसफर सिस्टम है (एसपीएफएस) है। अब रूस ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन के लिए इस सिस्टम का उपयोग करने का फैसला किया है। रूसी संसद ड्यूमा की वित्तीय बाजार समिति के प्रमुख अनातोली अक्साकोव ने कहा है कि एसपीएफएस एक वैकल्पिक सिस्टम है, जिसके जरिए अंतरराष्ट्रीय लेन-देन भी किया जा सकेगा। कुछ रूसी विशेषज्ञों ने दावा किया है कि स्विफ्ट से रूस का निष्कासन उसके लिए अच्छी खबर है। इससे रूस एसपीएफएस को अंतरराष्ट्रीय सिस्टम बनाने और रुबल को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बनाने की कोशिश में अपनी ताकत झोंकने को प्रेरित होगा।

चीन से बनाया स्विफ्ट का विकल्प

विशेषज्ञों के मुताबिक रूस, चीन के सिप्स (क्रॉस-बॉर्डर इंटरबैंक पेमेंट सिस्टम) का भी इस्तेमाल कर सकता है। चीन ने सिप्स को स्विफ्ट के विकल्प के तौर पर बनाया है। लेकिन अभी इसका इस्तेमाल बहुत कम होता है। अब संभावना जताई जा रही है कि चीन के साथ-साथ रूस और अमेरिकी प्रतिबंधों के शिकार अन्य देश इसे अधिक प्रचलन में लाने की कोशिश कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय कारोबार के जानकारों ने कहा है कि रूस पर लगाए गए नए प्रतिबंध दोधारी तलवार हैं। इससे रूस को जरूर नुकसान होगा, लेकिन इसका खराब असर यूरोपीय देशों पर भी पड़ेगा।

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यूरोपियन सेंटर फॉर इंटरनेशनल पॉलिटिकल इकोनॉमी की प्रमुख होसुक ली-माकियामा ने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से कहा कि रूस ने खुद को रूस से जोड़ रखा है, जबकि रूस ने अपने को यूरोप से अलग रखने की कोशिश की है। यूरोपियन यूनियन की कंपनियों ने रूसी संपत्तियों में 300 बिलियन डॉलर का निवेश कर रखा है। रूस इस धन को जब्त कर सकता है।

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