फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Russia Ukraine War Update: रूसी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह बर्बाद कर देना चाहते हैं पश्चिमी देश, क्या पूरा होगा मकसद?

Wed, 02 Mar 2022 03:35 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

विशेषज्ञों की नजर अब यह देखने पर है कि रूसी वित्तीय व्यवस्था का क्या हाल होता है। ऐसी खबरें हैं कि रूस में एटीएम मशीनों पर लंबी कतारें लग रही हैं। इससे देश में नकदी का संकट पैदा होने का अंदेशा पैदा हुआ है। कैपिटल इकोनॉमिक्स में उभरती अर्थव्यवस्थाओं के विशेषज्ञ अर्थशास्त्री लियाम पीच ने कहा है कि इन प्रतिबंधों के असर से रूसी बैंकों को अपनी संपत्तियां बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है...
विज्ञापन
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की - फोटो : Agency (File Photo)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पश्चिमी देशों ने यह साफ किया है कि रूस पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों का मकसद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दंडित करना है, जिन्होंने यूक्रेन पर हमला करके दुनिया को संकट में फंसा दिया है। अब तक घोषित प्रतिबंधों के जरिए रूस की बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्था को निशाना बनाया गया है। उद्देश्य रूसी अर्थव्यवस्था का संकट बढ़ाना है, ताकि उससे असंतुष्ट होकर रूस के लोग पुतिन को सत्ता से बाहर कर दें।

विज्ञापन


फ्रांस के वित्त मंत्री ब्रून ली मेयर ने मंगलवार को एक फ्रेंच टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा- ‘हम ऐसी स्थिति पैदा कर देंगे, जिससे रूसी अर्थव्यवस्था ढह जाएगी।’ हालांकि पश्चिमी देशों में यह अहसास है कि रूस दुनिया में ऊर्जा का एक प्रमुख सप्लायर है, इस कारण उसकी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह ठप कर देना आसान नहीं है। खुद यूरोप की भी प्राकृतिक गैस की अपनी 40 फीसदी और कच्चे तेल की 25 फीसदी जरूरत रूस पूरी करता है। रूस पर प्रतिबंध लगाने का एक नतीजा यूरोप में गैस और तेल की महंगाई के रूप में सामने आया है।

वैश्विक वित्त बाजारों से रूस को काटने की तैयारी

इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपियन, कनाडा, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों ने रूस पर जिस पैमाने पर प्रतिबंध लगाए हैं, वह अभूतपूर्व हैं। यहां तक कि स्विट्जरलैंड भी इस कारवां में शामिल हो गया है, जबकि वह अपने यहां मौजूद बैंक खातों की गोपनीयता की रक्षा करने के लिए जाना जाता है।

कैपिटल इकॉनमिक्स नामक एजेंसी में बाजार विशेषज्ञ ओलिवर एलन ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘पश्चिमी लोकतांत्रिक देशों ने जितने सघन प्रतिबंध लगाए हैं, उससे उनके देशों में भी बहुत से लोगों को हैरत हुई है। इन प्रतिबंधों का असर यह होगा कि रूस वैश्विक वित्त बाजारों से पूरी तरह कट जाएगा।’ उधर वाशिंगटन में राष्ट्रपति जो बाइडन प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा- ‘हमारी रणनीति यह है कि पुतिन यूक्रेन पर हमले को जितना आगे बढ़ाते हैं, रूसी अर्थव्यवस्था को उतना ही पीछे धकेल दिया जाए।’

संकट में फंस सकते हैं रूस के बैंक

विशेषज्ञों की नजर अब यह देखने पर है कि रूसी वित्तीय व्यवस्था का क्या हाल होता है। ऐसी खबरें हैं कि रूस में एटीएम मशीनों पर लंबी कतारें लग रही हैं। इससे देश में नकदी का संकट पैदा होने का अंदेशा पैदा हुआ है। कैपिटल इकोनॉमिक्स में उभरती अर्थव्यवस्थाओं के विशेषज्ञ अर्थशास्त्री लियाम पीच ने कहा है कि इन प्रतिबंधों के असर से रूसी बैंकों को अपनी संपत्तियां बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। हो सकता है कि उन्हें ये संपत्तियां औने-पौने दामों पर बेचनी पड़े।

विज्ञापन


पश्चिमी विशेषज्ञों का आकलन है कि रूसी बैंकों के पास विदेशी मुद्रा में जितनी रकम जमा है, उसकी तुलना में असल में 15 फीसदी ही ऐसी मुद्रा है। ऐसे में अगर बहुत से लोग अपनी रकम निकलना चाहेंगे, तो ये बैंक संकट में फंस जाएंगे। रूस के सेंट्रल बैंक पर भी इससे दबाव बढ़ेगा। लेकिन ये विशेषज्ञ यह स्वीकार करते हैं कि तेल और गैस का निर्यात रूस के लिए बड़ा सहारा है। तेल और गैस के बदले भुगतान करना खरीदार देशों की मजबूरी है। इसलिए रूसी अर्थव्यवस्था को ठप करने का पश्चिमी देशों का मकसद पूरा होने में लंबा समय लग सकता है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें