यूक्रेनी सरकार ने दावा किया है कि रूसी सेना ने अपने मृतक सैनिकों के शवों को जलाने के लिए मोबाइल श्मशान कक्ष भेजे हैं। रूसी लोग यहां मर रहे हैं, कोई उनकी गिनती नहीं कर रहा है।
रूस और यूक्रेन के बीच लगातार 29वें दिन भी जंग जारी है। रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन की सेना जहां आए दिन आक्रामक होती जा रही है वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की भी हथियार डालने के लिए तैयार नहीं हैं। इस बीच यूक्रेन में रूस के हमले के बाद पैदा हुए मानवीय संकट को लेकर मसौदा प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में बुधवार को हुए मतदान में भारत समेत 13 सदस्य देशों ने हिस्सा नहीं लिया। जिसके बाद यह प्रस्ताव यूएनएससी में विफल रहा।
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वहीं इस बीच अपने सैनिकों को लेकर ही रूस के इरादों पर सवाल उठ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले एक महीने से जारी युद्ध में युक्रेन ने 15,600 से ज्यादा रूसी सैनिकों को मार गिराने का दावा किया है, लेकिन संभवत: रूस अपने मारे जाने वाले सैनिकों की असल संख्या दुनिया से छिपाने की कोशिश कर रहा है।
शवों से दुर्गंध फैलने लगा
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि यूक्रेन के दक्षिणी मायकोलाइव क्षेत्र में मृतक सैनिकों के शवों की गंध वातावरण में फैलने लगी है। जमीनों पर जहां-तहां बिखरे रूसी सैनिकों के शव एक समस्या बन रहे हैं।
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बीते शनिवार की रात क्षेत्र के गवर्नर विटाली किम ने अपने वीडियो संबोधन में स्थानीय निवासियों से लाशों को इकट्ठा करने और उन्हें बैग में रखने में मदद करने का आह्वान किया। उन्होंने लोगों से लाशों को उठाने का आग्रह करते हुए कहा ‘हम जानवर नहीं हैं, ना?’
सीएनएन के मुताबिक किम ने कहा कि रूसी पीछे हट गए थे और युद्ध के मैदान पर उन्होंने अपने सहयोगियों के जले हुए शवों को पीछे छोड़ दिया। उन्होंने सीएनएन को छोड़ी हुई लाशों की कई तस्वीरें भी भेजीं जो उनके मुताबिक सैकड़ों की संख्या में है।
24 फरवरी को रूसी हमले के बाद मायकोलाइव भी उन शहरों में एक था जहां सबसे पहले हमला हुआ था। लेकिन यहां यूक्रेन की सेना ने उन्हें पीछे धकेल दिया। रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि यहां कई रूसी सैनिक मारे गए हैं। उन्होंने काले रंग के लड़ाकू वाहनों और कुछ टैंकों को भी छोड़ दिया है। लेकिन शहर में लड़ाई जारी है और यह साफ नहीं है कि यूक्रेनी सेना कब तक हमले को रोकने में सक्षम होगी?
ब्लादीमिर पुतिन
- फोटो : Pixabay
मृतकों पर चुप्पी
गर्वनर ने जले हुए शवों को रेफ्रिजरेटर में रखने और उनका डीएनए परीक्षण कराने के लिए उन्हें रूस वापस भेजने का आह्वान किया है। लेकिन, युद्ध के एक महीना होने के बाद भी अभी तक यह साफ नहीं है कि सैनिकों के शवों को रूस वापस कैसे भेजा जाएगा क्योंकि मरने वालों की संख्या के बारे एक तरह की खामोशी छाई हुई है।
ऐसा इसलिए है क्योंकि रूस युद्ध के बारे में किसी भी तरह की जानकारी बाहर निकलने को लेकर मीडिया आउटलेटस पर सख्ती बरत रहा है। केवल सरकारी मीडिया ही इस बारे में नपी-तुली जानकारी दे रही है। पश्चिमी मीडिया के साथ-साथ सोशल नेटवर्क साइट्स ट्विटर और फेसबुक तक को रूसी क्षेत्र में प्रतिबंधित कर दिया है।
पुतिन समर्थित टैब्लॉइड से हुआ खुलासा
वास्तव में यूक्रेन में कितने रूसी सैनिक मारे गए हैं यह एक रहस्य बना हुआ है। हालांकि इसका एक खुलासा तब हुआ जब पुतिन समर्थक रूसी टैब्लॉइड कोम्सोमोल्स्काया प्रावदा ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें मरने वाले सैनिकों की संख्या 9,861 बताई गई। दो मार्च तक रूस का रक्षा मंत्रालय यही कह रहा था कि केवल 498 सैन्य कर्मी मारे गए हैं।
बाद में टैब्लॉइड ने यह कहते हुए अपनी रिपोर्ट वापस ले ली और वेबसाइट को हैक कर लिया गया था और मारे गए सैनिकों की संख्या की अभी तक पुष्टि नहीं की गई है।
सही संख्या बताने से इनकार
पश्चिमी देशों का मानना है कि असल में मौत के आंकड़े कहीं ज्यादा हैं। लेकिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को सीएनएन को बताया ‘जहां तक संख्याओं का संबंध है, हम शुरू से ही इस बात पर सहमत हैं कि हम जानकारी का खुलासा नहीं करेंगे।’ रूसी अधिकारियों का यह कहना है कि जो भी सैनिकों की मौत के आंकड़ों के बारे में बात कर रहा है, वो अफवाह फैला रहा है।
सीएनएन के मुताबिक टैब्लॉइड कोम्सोमोल्स्काया प्रावदा का आंकड़ा संख्या अमेरिका और नाटो के अधिकारियों द्वारा सीएनएन के साथ साझा की गई जानकारी से मेल खाती है, जिन्होंने हाल ही में अनुमान लगाया था कि रूसी हताहतों की संख्या 3,000 से 10,000 के बीच है।
वहीं यूक्रेन के अधिकारियों ने दावा है कि मरने वाले रूसी सैनिकों की 15,000 से अधिक हो सकती है। सीएनएन रूसी सैनिकों की मौतों की कुल संख्या को सत्यापित करने में असमर्थ रहा है।
होमेल क्षेत्र में स्थित एक अस्पताल के कर्मचारी ने रेडियो लिबर्टी को बताया कि 13 मार्च तक ढाई हजार से ज्यादा रूसी सैनिकों के शवों को रूस भेजा जा चुका है। हालांकि इस कर्मचारी के द्वारा बताए गए आंकड़े कितने सही हैं, इसकी अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई है।
क्या इस तरह अपने सैनिकों को अंतिम विदाई दे रहा रूस?
यूक्रेनी सरकार ने दावा किया है कि रूसी सेना ने अपने मृतक सैनिकों के शवों को जलाने के लिए मोबाइल श्मशान कक्ष भेजे हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदीमिर जेंलेंस्की ने तीन मार्च को एक ब्रीफिंग में संवाददाताओं से कहा था ‘रूसी लोग यहां मर रहे हैं, कोई उनकी गिनती नहीं कर रहा है। क्या आप जानते हैं कि वे अपने साथ एक श्मशान कक्ष लाए हैं? वे सैनिकों के परिवार वालों को शव नहीं दिखाने जा रहे हैं। वे माताओं को यह नहीं बताएंगे उनके बच्चों की मृत्यु यहां हो गई।’
उसी दिन राज्य के स्वामित्व वाली यूक्रेनी रेलवे, उक्रजालिज्नित्सिया ने अपनी वेबसाइट पर एक बयान में कहा कि उसने ओडेसा सहित कई क्षेत्रों से मृत रूसी सैनिकों के शवों को हटाने के लिए यूक्रेनी सेना को 20 रेफ्रिजेरेटेड कार दी है।
यूक्रेन की सरकार ने कहा कि वह अभी भी मारे गए लोगों के शवों को वापस लाने के लिए रूसी अधिकारियों से अनुरोध की प्रतीक्षा कर रही है। यूक्रेन के उप प्रधान मंत्री ने गुरुवार को कहा कि प्रधान मंत्री डेनिस शिमगल और रेड क्रॉस की अंतर्राष्ट्रीय समिति के अध्यक्ष पीटर मौरर के बीच एक बैठक में शवों को इकट्ठा करने और उनकी पहचान के मुद्दे पर चर्चा की गई थी।