Russia-Ukraine War: रूस प्राकृतिक गैस
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यूक्रेन युद्ध शुरू होने के सात महीने बाद रूस विरोधी यूरोपीय एकता में दरार पड़ती नजर आ रही है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की ‘युद्ध उन्मादियों’ की आलोचना को इस बात का ही सबूत माना जा रहा है। मैक्रों ने कहा है कि ‘यूरोप में कुछ देशों को अकेले रूस के खिलाफ कार्रवाई तय करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।’
इस बीच खबर है कि इटली में 25 सितंबर को होने वाले आम चुनाव में रूस से सहानुभूति रखने वाली पार्टियों के समर्थन में भारी इजाफा हुआ है। ताजा जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक गियोर्गिया मेलोनी के नेतृत्व वाली धुर दक्षिणपंथी ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी, मेतियो सेलविनी के नेतृत्व वाली नॉदर्न लीग, और सिल्वियो बर्लुस्कोनी के नेतृत्व वाली फोर्जा इटैलिया आम चुनाव के बाद साझा सरकार बनाने की स्थिति में होंगी। समझा जाता है कि सरकार बनने के बाद मेतियो सेलविनी और सिल्वियो बर्लुस्कोनी रूस पर से प्रतिबंध हटाने के लिए दबाव बनाएंगे।
वेबसाइट एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक यूरोपियन यूनियन (ईयू) के सदस्य हंगरी देश सबसे पहले ईयू के रूस विरोधी सख्त रुख के खिलाफ आवाज उठाई। उसकी दलील है कि वह अपनी जनता के हितों की कीमत पर रूस के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकता। बाल्टिक देशों और पोलैंड जैसे पूर्वी यूरोपीय देशों का रुख आरंभ में रूस के प्रति बेहद सख्त था। लेकिन अब इन देशों के अंदर भी यूक्रेन के समर्थन में किसी हद तक जाने की नीति के खिलाफ आवाज उठने लगी है। हाल ही में पोलैंड की संसद में इस नीति का खुला विरोध किया।
लेकिन रूस विरोधी सख्ती की नीति को सबसे तगड़ा झटका जर्मनी के चांसलर ओलोफ शोल्ज के रुख से लगा है। शोल्ज प्रतिबंधों के मामले में धीमी गति से चलने की वकालत कर रहे हैं। ताजा खबर के मुताबिक मंगलवार को उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बात की। ईयू में जर्मनी सबसे ज्यादा रूसी प्राकृतिक गैस पर निर्भर है।
इस बीच अब मैक्रों ने भी रूस के साथ संवाद बनाए रखने पर जोर दिया है। बीते हफ्ते उन्होंने कहा- ‘हम सबसे संवाद कायम रखने की नीति पर चलना चाहिए- उन लोगों से भी जिनसे हम असहमत हैं।’ मैक्रों का ये बयान रूसी गैस कंपनी गैजप्रोम के फ्रांस की कंपनी एनजी को गैस सप्लाई पूरी तरह रोक देने के एक दिन बाद आया।
रूसी गैस की सप्लाई घटते जाने के कारण पूरे यूरोप में इस समय महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर है। गहराते ऊर्जा संकट के कारण आने वाली सर्दियों में घरों को गर्म रखने को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। इटली भी इसका शिकार है। इसका असर वहां चुनाव अभियान पर दिख रहा है। बीते हफ्तों में मेलोनी के नेतृत्व वाले गठबंधन की बढ़त दो अंकों में पहुंच गई है। जबकि रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों की समर्थक मध्यमार्गी पार्टियों के समर्थन में भारी गिरावट आई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक अभी यह तय नहीं है कि इटली में धुर दक्षिणपंथी गठबंधन की जीत के बाद वहां की विदेश नीति में बुनियादी बदलाव आ जाएगा। लेकिन यह स्पष्ट है कि यूरोप में जनमत तेजी से रूस-यूक्रेन युद्ध में जरूरत से ज्यादा अपने देशों को उलझाने के खिलाफ होता जा रहा है।