क्या है फादर ऑफ ऑल बॉम्ब?
फादर ऑफ ऑल बॉम्ब को सबसे घातक थर्मोबेरिक हथियार कहा जाता है। इसे एविएशन थर्मोबेरिक बॉम्ब ऑफ इन्क्रीज्ड पॉवर कहा जाता है। रूस ने इसे साल 2007 में विकसित किया था। इसे दुनिया का सबसे घातक गैर परमाणु हथियार कहा जाता है। फादर ऑफ ऑल बॉम्ब का वजन 7100 किलोग्राम है और यह एक ही बार में करीब 44 टन टीएनटी की ताकत का धमाका कर सकता है। इस बम की विनाशकारी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह एक बार के इस्तेमाल में करीब 300 मीटर के क्षेत्र को जलाकर खाक कर सकता है।
कैसे करता है काम?
फादर ऑफ ऑल बॉम्ब थर्मोबेरिक हथियार है। इसे वैक्यूम बॉम्ब के नाम से भी जाना जाता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी है कि यह वातावरण से ऑक्सीजन को सोख लेता है और खुद को अधिक शक्तिशाली बनाकर जमीन से ऊपर ही धमाका करता है। इस धमाके से किसी सामान्य (कम ताकत के) परमाणु बम की तरह ही गर्मी पैदा होती है। इसके साथ ही धमाके से एक अल्ट्रासोनिक शॉकवेव भी निकलता है जो और अधिक तबाही लाता है। यही कारण है कि इस हथियार को किसी भी अन्य पारंपरिक हथियार से अधिक शक्तिशाली माना जाता है।
अमेरिका के पास मदर ऑफ ऑल बॉम्ब
रूस का फादर ऑफ ऑल बॉम्ब अमेरिका के मदर ऑफ ऑल बॉम्ब के खिलाफ तैयार किया गया हथियार है। साल 2003 में अमेरिका ने फ्लोरिडा में इस बम का परीक्षण किया था। इसका आधिकारिक नाम GBU-43/B है। यह बम ताकत के मामले में रूस के बम से कहीं पीछे है। इसका वजन करीब 10,000 किलोग्राम है और यह 11 टीएनटी के करीब ताकत से धमाका करता है। यह अपने धमाके की चपेट में 150 से 300 मीटर तक के क्षेत्र में तबाही लाने की ताकत रखता है।
कब-कब हुआ इस्तेमाल?
साल 2017 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान में मदर ऑफ ऑल बॉम्ब का इस्तेमाल किया था। कई मीडिया रिपोर्ट बताती है कि साल 2017 में ही रूस ने भी सीरिया में थर्मोबेरिक हथियार फादर ऑफ ऑल बॉम्ब का इस्तेमाल किया था।
रूस जल्द ही यूक्रेन में कर सकता है इस्तेमाल
विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और विदेशी रक्षा एजेंसियों की ओर से इस बात का दावा किया जा रहा है कि रूस किसी भी वक्त यूक्रेन में फादर ऑफ ऑल बॉम्ब का इस्तेमाल कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने अपनी सेना को इसके लिए आदेश भी दे रखे हैं।
जेलेंस्की ने देश छोड़ने से किया इंकार
अमेरिका ने रूसी हमले के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की को देश से निकालने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, जेलेंस्की ने इसके लिए मना कर दिया है। उन्होंने कहा है कि, उन्हें लड़ने के लिए हथियार चाहिए, गाड़ी नहीं।