रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस की दलीलों को सुन रहा है और दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर आपसी समझ बनी है। पुतिन ने दावा किया कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन की तरह अब रूस की दलीलों को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि अब एक रचनात्मक संवाद की उम्मीद दिख रही है।
पुतिन चीन दौरे पर हैं और उन्होंने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति रॉबर्ट फिको के साथ बैठक में यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन के साथ बातचीत में फर्क साफ नजर आ रहा है। हालांकि, ट्रंप रूस पर दबाव भी बनाए हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यूक्रेन में शांति प्रयासों में रूस की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई है और कड़े परिणामों की चेतावनी भी दी है।
ट्रंप का दबाव और चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध खत्म करने को अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल किया है। पिछले महीने अलास्का में हुई शिखर वार्ता में उन्होंने पुतिन से सीधे मुलाकात भी की थी। इसके बावजूद उन्होंने साफ किया कि अगर रूस ने शांति प्रयासों में सहयोग नहीं किया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
ये भी पढ़ें- अपनी खास रेलगाड़ी से चीन पहुंचे उत्तर कोरियाई नेता, इस चलते-फिरते महल पर बमों का भी नहीं होता असर
एससीओ सम्मेलन और चीन के साथ बैठक
पुतिन चीन के तियानजिन शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन में शामिल हुए। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी मौजूद रहे। सम्मेलन के बाद पुतिन ने बीजिंग में शी जिनपिंग से द्विपक्षीय वार्ता की और बुधवार को द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ पर आयोजित सैन्य परेड में हिस्सा लेना है।
पश्चिमी देशों का आरोप
बीजिंग में पुतिन ने वार्ता को लेकर सकारात्मक लहजा दिखाया लेकिन रूस की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा। पश्चिमी नेताओं का आरोप है कि पुतिन केवल समय निकाल रहे हैं जबकि रूसी सेना यूक्रेनी मोर्चों को कमजोर करने में लगी है।
यूक्रेन के भविष्य को लेकर पुतिन ने कहा कि युद्ध के बाद सुरक्षा गारंटियों पर सहमति बन सकती है। हालांकि, उन्होंने फिर दोहराया कि रूस कभी भी यूक्रेन की नाटो सदस्यता स्वीकार नहीं करेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यूक्रेन के यूरोपीय संघ में शामिल होने से कोई आपत्ति नहीं है।
ये भी पढ़ें- फलस्तीन को मान्यता देने की तैयारी में बेल्जियम, इस्राइल ने लगाई कड़ी फटकार
जापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र मुद्दा
पुतिन ने यूरोप के सबसे बड़े और दुनिया के दस प्रमुख परमाणु संयंत्रों में से एक ज़ापोरिज्जिया प्लांट का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर रूस अमेरिका के साथ काम कर सकता है। पुतिन ने यह भी कहा कि हालात अनुकूल होने पर रूस और यूक्रेन भी इस विषय पर सहयोग कर सकते हैं।
पुतिन के बयान से यह साफ होता है कि रूस और अमेरिका के बीच संवाद की स्थिति पहले से अलग है। हालांकि ट्रंप प्रशासन की चेतावनी और पश्चिमी देशों का दबाव अभी भी रूस पर बना हुआ है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह आपसी समझ वास्तव में यूक्रेन युद्ध खत्म करने की दिशा में ठोस कदम साबित होगी या नहीं।