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अमेरिका : रूस-यूक्रेन युद्ध को 'नरसंहार' बताते हुए बोले बाइडन- यूक्रेन का 'सफाया' करना चाहते हैं पुतिन

Wed, 13 Apr 2022 06:57 AM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन।

सार

यूक्रेन और रूस के बीच जारी जंग को लेकर वाॅशिंगटन लौटने के लिए एयरफोर्स वन पर सवार होने से कुछ समय पहले आयोवा में बोलते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन कहा कि उन्होंने पहले ही कहा था कि पुतिन यूक्रेन में नरसंहार कर रहे हैं। यूक्रेन में हजारों लोगों और रूसी सैनिकों के मारे जाने की खबरें आ रही हैं। 
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन - फोटो : PTI
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विस्तार
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यूक्रेन के साथ जारी रूस की जंग को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने एक बार फिर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर निशाना साधा है। बाइडन ने कहा है कि मैंने पहले ही कहा था पुतिन यूक्रेन में नरसंहार कर रहे हैं। बाइडन ने पुतिन पर यूक्रेनी होने के विचार को ही जड़ से मिटाने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया।

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वाॅशिंगटन लौटने के लिए एयरफोर्स वन पर सवार होने से कुछ समय पहले आयोवा में बोलते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन कहा कि उन्होंने पहले ही कहा था कि पुतिन यूक्रेन में नरसंहार कर रहे हैं। यूक्रेन में हजारों लोगों और रूसी सैनिकों के मारे जाने की खबरें आ रही हैं। 

उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि हाँ, मैंने इसे नरसंहार कहा। यह स्पष्ट और पूरी तरह से स्पष्ट हो गया है कि पुतिन सिर्फ यूक्रेनी होने के विचार को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। बाइडन ने कहा कि यह तय करना वकीलों का काम है कि रूस का आचरण नरसंहार के अंतरराष्ट्रीय मानक को पूरा करता है या नहीं, लेकिन मैं कहूंगा कि यह निश्चित रूप से मुझे ऐसा ही लगता है।
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उन्होंने कहा कि रूसियों ने यूक्रेन में जो भयानक चीजें की हैं, उसके बारे में और अधिक सबूत सामने आ रहे हैं, और हम केवल तबाही के बारे में अधिक से अधिक जानते जा रहे हैं और कानून के जानकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह तय करने दें कि यह योग्य है या नहीं।

बाइडन ने पहले कहा था कि उन्हें विश्वास नहीं है कि रूस की कार्रवाई नरसंहार वाली है, बस उन्होंने युद्ध अपराध किए हैं। पिछले अमेरिकी नेताओं ने अक्सर अंतरराष्ट्रीय नरसंहार सम्मेलन में अपने दायित्व निभाने से बचने के लिए यूक्रेन में रूस के नरसंहार की घटनाओं को औपचारिक तौर पर खूनी संघर्ष करार देकर चकमा दिया है।

क्योंकि सम्मेलन में नरसंहार की औपचारिक रूप से पहचान होने के बाद हस्ताक्षर करने वाले देशों को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने 1994 में रवांडा हुतस की 800,000 जातीय तुत्सी की हत्या को नरसंहार के रूप में घोषित नहीं किया था।

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