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Russia Ukraine War : क्या कीव के नजदीक जेलेंस्की की सेना मजबूत हो रही, बेलारूस के भी इस जंग में कूदने की आशंका क्यों है?

Wed, 23 Mar 2022 01:11 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

बोरोड्यंका एक ऐसा शहर है, जिस पर रूसी सेना ने शुरू में ही कब्जा कर लिया था। यदि यूक्रेनी सेना इसे वापस ले लेती है तो भी रूसी सेना को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है।
 
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राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की यूक्रेनी सैनिक से हाथ मिलाते हुए - फोटो : Agency
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विस्तार
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रूस और यूक्रेन के बीच भीषण लड़ाई चल रही है। बुधवार को युद्ध का 28वां दिन है, लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है। न यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की रूस के सामने समर्पण को तैयार हैं न राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जंग रोकने को।
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इस बीच एक वरिष्ठ अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने यह दावा किया है कि यूक्रेन की सेना पिछले कुछ दिनों से रूस से अपना क्षेत्र वापस पाने की कोशिश कर रही है और उन्होंने यूक्रेनी सेना के ऐसा करने में ‘सक्षम और इच्छुक’ बताया है।

सीएनएन की रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ऐसा लग रहा है कि कीव के उत्तर और पश्चिम में यूक्रेनी सेना ने रूस पर पलटवार करने में कुछ प्रगति की है, जिससे राजधानी को घेरने के रूसी प्रयास सफल नहीं हो पा रहे हैं। 
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क्या कीव के नजदीक मजबूत साबित हो रही है जेलेंस्की की सेना? 
रिपोर्ट के मुताबिक कीव से 30 मील (48 किलोमीटर) पश्चिम में एक महत्वपूर्ण मकारिव शहर को लेकर ऐसा दावा किया जा रहा है कि अब इस पर यूक्रेनी सेना का कब्जा हो गया है। यूक्रेन की सेना ने मंगलवार को एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि कई दिनों की लड़ाई के बाद, यूक्रेनी बलों ने इस शहर पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। हालांकि सीएनएन इस दावे की पुष्टि नहीं कर सका।

हालांकि कई वीडियो में मकारिव में भारी तबाही दिखाई दे रही है जहां रूसी हवाई हमलों से शहर को काफी नुकसान हुआ है। कहा जा रहा है कि यदि यूक्रेनी सेना मकरिव पर अपना नियंत्रण मजबूत कर लेती है, तो रूसी सेनाओं के लिए पश्चिमी हिस्से से कीव तक पहुंचने और बाद में फिर दक्षिण की ओर आगे बढ़ाना अधिक कठिन हो सकता है।

इस बात के भी संकेत मिल रहे हैं कि रूसी सेना कीव के उत्तर में उन क्षेत्रों में भी झटका लगा है, जहां उन्होंने हमले के बाद से ही लगभग कब्जा कर रखा है।

कीव में रूस का हमला - फोटो : twitter/KyivPost
कीव पर कब्जा मुश्किल?
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर यूक्रेनी सेना मकारिव को रूसी सेना से छीन कर अपने नियंत्रण में ले लेती है तो इस शहर और कीव के बीच रूस की स्थिति कमजोर हो जाएगी। जिससे राजधानी को घेरने के उसके लक्ष्य में बाधा आएगी।

इसी तरह मकारिव के उत्तर में लगभग 12 मील (20 किलोमीटर) दूर बोरोड्यंका शहर है, जिस पर रूसी सेना ने शुरू में ही कब्जा कर लिया था। यदि यूक्रेनी सेना बोरोड्यंका को वापस ले लेती है तो भी रूसी सेना को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। 

वहीं कीव की तरफ बढ़ने के लिए इरपिन नदी भी रूसी सेना को रोक रही है। सोमवार की सैटेलाइट इमेज में यह देखा गया कि यूक्रेन की इरपिन नदी की तरफ तेजी से पानी आ रहा है। कीव की ओर बढ़ने के लिए इस नदी को पार करना रूसी सेना के लिए महत्वपूर्ण है। यदि वे इसे पार नहीं कर सकते, तो भी वे पश्चिम से कीव की तरफ नहीं बढ़ सकते। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि नदी में इतना पानी आया कहां से ? 

खेरसॉन को वापस पाने के लिए चल रहा मुकाबला
रिपोर्ट के मुताबिक एक वरिष्ठ अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने कहा कि यूक्रेनियन दक्षिणी शहर खेरसॉन को वापस लेने के भी मुकाबला कर रहे हैं। दूसरी तरफ मायकोलाइव के उत्तर-पूर्व से रूसी सेना को पीछे धकेल रहे हैं, जिससे उन्हें शहर के दक्षिण में जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के साथ बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको - फोटो : Social Media
क्या रूस का प्रमुख सहयोगी बेलारूस, पुतिन के युद्ध में शामिल होगा?
यूक्रेन के अभी तक हथियार नहीं डालने की स्थिति में अंदाजा इस बात का लगाया जा रहा है कि इस युद्ध में रूसी राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन का साथ देने के लिए रूस का प्रमुख सहयोगी बेलारूस भी इस जंग में कूद सकता है।

यूक्रेन के जनरल स्टाफ के पूर्व उप प्रमुख और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट-जनरल इहोर रोमानेंको ने एक न्यूज चैनल को दिए अपने बयान में कहा है कि बेलारूस मास्को की तरफ से इस युद्ध में शामिल हो सकता है। उनके मुताबिक भारी नुकसान उठा रही रूसी सेना की मदद के लिए बेलारूस 10 से 15 बटालियन भेज सकता है। उन्होंने कहा कि देखते हैं कि चीजें कैसे सामने आती हैं,  लेकिन ऐसा हो सकता है।

रोमानेंको से पहले भी कई रक्षा विशेषज्ञ बहुत पहले ही इस बात को कह चुके हैं बेलारूस रूस के साथ मिलकर यूक्रेन पर हमला कर सकता है। 

ऐसी आशंका क्यों?
क्योंकि बेलारूस रूस का बड़ा हमदर्द और उसका सहयोगी है। यह यूक्रेन के साथ लंबी सीमा साझा करता है।

बेलारूस के नेता अलेक्जेंडर लुकाशेंको रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अपना करीबी सहयोगी बताते हैं।
 
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बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको - फोटो : Social Media
यूक्रेन पर हमले से पहले फरवरी के पहले सप्ताह में रूस और बेलारूस ने 10 दिवसीय संयुक्त सैन्य अभ्यास किया था। 

यूक्रेन पर हमले से पहले रूस ने बेलारूस की सीमा पर ही अपने सैनिकों की तैनाती की। यह शीत युद्ध के बाद से बेलारूस में रूस की सबसे बड़ी तैनाती मानी गई है। यूक्रेन पर हमला यहीं से हुआ।

एक मार्च को यूक्रेन ने दावा किया कि बेलारूस के सैनिकों ने यूक्रेन पर हमला कर दिया है। यूक्रेन के नॉर्थ टेरिटोरियल डिफेंस फोर्सेज के प्रवक्ता विटाली क्यारीलोव ने कहा कि बेलारूस के सैनिक उत्तर-पूर्वी यूक्रेन के चेर्निहाइव शहर में घुस गए।

बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने यह तो स्वीकार किया कि बेलारूस के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए सीमा पर तैनाती समूहों को भेजा गया है, लेकिन उन्होंने इस बात को स्वीकार नहीं किया कि उनके सैनिकों ने भी युद्ध में हिस्सा ले लिया है। 

 
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