एक ओर जहां रूसी सेना बमबारी कर थी। वहीं, एक शेल्टर होम में 23 वर्षीय महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया है। यूक्रेन के सबसे बुरे समय में छोटी सी बच्ची की मां के साथ तस्वीर को उम्मीद की किरण के रूप में देखा जा रहा है।
रूसी सेना की बमबारी के शोर के बीच एक शेल्टर होम में पनाह ले रही 23 वर्षीय महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया है। रूसी सेना यूक्रेन पर कब्जा करने के लिए लगातार आगे बढ़ रही है। ऐसे में अराजकता के इस माहौल में जन्मी नन्ही बच्ची को उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।
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रूस के हमले से बचने के लिए यूक्रेन के लोग सुरक्षित जगहों पर शरण ले रहे हैं। एक अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन में शरण ले रही यूक्रेन की एक 23 वर्षीय महिला को लेबर पेन होने लगा। ऐसे में उसको अस्पताल पहुंचना मुमकिन नहीं था तो सबसे तनावपूर्ण परिस्थिति में शेल्टर होम में ही उसकी डिलीवरी कराई गई। लोगों की मदद से रात 8:30 बजे से ठीक पहले नन्ही बच्ची को दुनिया में लाया गया।
पुलिस ने की मदद, पहुंचाया अस्पताल
बाहर मौजूद यूक्रेन की पुलिस ने जब महिला की चीख सुनी तो वह मदद के लिए पहुंच गई। एक अधिकारी मायकोला श्लापत ने बताया कि महिला की चीख सुनकर जब पुलिस वहां पहुंची तो बच्ची के जन्म देने में उन्होंने महिला की मदद की और एंबुलेंस को बुलाकर उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। बताया जा रहा है कि दोनों मां-बेटी स्वस्थ हैं।
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चमत्कार के रूम में देख रहे बच्ची की जन्म
बच्ची के जन्म को एक चमत्कार के रूप में देखा जा रहा है। लोगों का मानना है कि शायद अब जंग रुक जाए। एक महिला ने कहा कि इस निराशाजनक समय में नन्ही बच्ची का जन्म लेना किसी उम्मीद से कम नहीं है। यूक्रेन के सबसे बुरे समय में छोटी सी बच्ची की मां के साथ तस्वीर को उम्मीद की किरण के रूप में देखा जा रहा है।
डेमोक्रेसी इन एक्शन कॉन्फ्रेंस हन्ना होपको की चेयरमैन ने इस पूरी घटना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बच्ची का जन्म आज रात को कीव में हो रही बमबारी के बीच हुआ है। इस चुनौतीपूर्ण समय में बच्ची को जन्म देने के बाद मां खुश है। मां ने बच्ची का नाम मिया रखा है।
ऐसी अकेली बच्ची नहीं है मिया
एक डॉक्टर ने जानकारी दी रूस की ओर से किए गए हमले के दौरान जन्मे बच्चों में अकेले मिया नहीं है। मां की अनुमति लेकर डॉक्टर ने बताया कि एक छोटे बच्चे का जन्म भी इस दौरान हुआ है।