यूक्रेन से रूसी सेना को खदेड़ने का संकल्प
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने देश की स्वाधीनता के 31 वर्ष पूरे होने पर यूक्रेन से रूसी सेना को पूरी तरह खदेड़ने का संकल्प लिया। साथ ही कहा कि यूक्रेन का उस वक्त पुनर्जन्म हुआ था जब छह माह पहले रूस ने उस पर आक्रमण किया था। उन्होंने कहा, 24 फरवरी को सुबह 4 बजे दुनिया में एक नया राष्ट्र दिखाई दिया। इस रूसी हमले ने देश में राष्ट्रवाद की भावना को पुनर्जीवित किया। सही मायनों में इस दिन यूक्रेन का पुनर्जन्म हुआ क्योंकि न तो यह देश रोया, न चिल्लाया और न ही रूस से डरा। बाद में जेलेंस्की व उनकी पत्नी ने यूक्रेन के सभी धार्मिक नेताओँ के साथ समारोह में भाग लिया।
अमेरिका देगा तीन अरब डॉलर की अतिरिक्त मदद
बाइडन प्रशासन यूक्रेन की सेनाओं को करीब तीन अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता जारी करने की घोषणा कर सकता है। आने वाले सालों में यूक्रेनी सैनिकों को लड़ाई के लिए प्रशिक्षित करने के वास्ते यह राशि जारी की जा सकती है। अधिकारियों ने कहा कि इस पैकेज को तीन प्रकार के ड्रोन तथा अन्य हथियार और उपकरणों के अनुबंधों पर खर्च किया जा सकेगा। इसमें छोटे, हाथ से चलाए जा सकने वाले प्यूमा ड्रोन, लंबी दूरी के स्कैन ईगल निगरानी ड्रोन और पोत से छोड़े जा सकने वाले ब्रिटिश वैम्पायर ड्रोन प्रणाली शामिल है।
भारतीय कंपनियों ने नहीं की रूस पर प्रतिबंधों की अनदेखी : अमेरिका
यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर रूस पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों को भारतीय कंपनियों द्वारा दरकिनार करने का कोई प्रमाण नहीं है। यह बात अमेरिकी सरकार में उप वित्त मंत्री वैली अडेयेमो ने कही है। आईआईटी-बॉम्बे में उन्होंने संवाददाताओं से कहा, भारत, अमेरिका और यूरोप समेत दुनियाभर की कंपनियां रूस पर लगे प्रतिबंधों को गंभीरता से लेते हुए उन्हें लागू कर रही हैं।
भारतीय कंपनियों द्वारा इनकी अनदेखी का कोई सबूत नहीं है। यह टिप्पणी रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा के हवाले से छपी उन रिपोर्टों के बाद आई है, जिनमें भारतीय कंपनियों को लेकर अमेरिका की चिंता जाहिर की गई थी। इनमें कहा गया था कि अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए रूसी कच्चे तेल से बने ईंधन का निर्यात करने के लिए भारत का इस्तेमाल किया जा रहा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी होगी चर्चा
वह भारतीय अधिकारियों के साथ बातचीत में रूस और यूक्रेन युद्ध के साथ-साथ द्विपक्षीय विषयों पर चर्चा करेंगे। हमें तात्कालिक चिंताओं से भी आगे बढ़कर देखने की जरूरत है, जिसमें महंगाई समेत कई आर्थिक मुद्दे शामिल हैं। इस जंग के कारण ही भारतीय उपभोक्ताओं को ऊर्जा के लिए पहले से ज्यादा पैसे चुकाने पड़ रहे हैं।