रूस ने चीन को एडवांस्ड एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली प्रदान की है। इसमें कई चौंकाने वाले फीचर हैं। रूसी एस-400 ट्रायम्फ वायु रक्षा प्रणालियों को अपनी श्रेणी में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों में से एक है। ये खाास विशेषताओं, बहुमुखी प्रतिभा और कई प्रकार के हवाई लक्ष्यों को रोकने की क्षमता से प्रतिष्ठित हैं।
यह भी पढ़ें -
US: ऑटो क्षेत्र को राहत, ट्रंप ने किया 25% टैरिफ में बदलाव का एलान; अमेरिकी कार कंपनियों को लाभ की उम्मीद
2014 में चीन और रूस के बीच हुआ था करार
2014 में, बीजिंग ने कई एस-400 डिवीजनों की खरीद के लिए मॉस्को साथ कई अरब डॉलर का करार किया था। कई साल बाद, उस सौदे के दिलचस्प विवरण सामने आए, स्थानीय मीडिया के अनुसार इस सौदे ने दुनिया भर का ध्यान आकर्षित किया और इसे चीनी-रूसी सैन्य सहयोग का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना गया। साथ ही चीन के लिए अपनी राष्ट्रीय वायु रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम भी माना गया।
चीन ने एस-400 की डील को रखा गुप्त
चीन ने रूस से एडवांस्ड एस-400 खरीद की जानकारी को अब तक गुप्त रखा है। चीनी सेना की किसी भी सार्वजनिक रिपोर्ट में इसका जिक्र तक नहीं है। न ही इसकी तैनाती और इस्तेमाल के बारे में कोई जानकारी बाहर आई है। चीनी मीडिया के मुताबिक चीन रूसी वायु रक्षा प्रणालियों पर बहुत अधिक निर्भर है। चीन को उम्मीद थी कि रूस से मिली ये प्रणाली उसकी वायु सुरक्षा को बेहद मजबूत बनाएगी। लेकिन कुछ वर्षों बाद बाद स्थिति अलग निकली। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब इन एस-400 प्रणाली की चर्चा भी नहीं होती, न ही चीनी सेना की रिपोर्टों में इनका जिक्र आता है।
यह भी पढ़ें -
Earthquake: न्यूजीलैंड के पश्चिमी तट के पास 6.2 तीव्रता का भूकंप, सुनामी की चेतावनी नहीं की गई जारी
रूस ने क्यों छिपाए एस-400 के खासियत
रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने जानबूझकर इन मिसाइल प्रणाली के कुछ महत्वपूर्ण फीचर चीन को नहीं दिए। यानी जो वर्जन चीन को दिया गया, वह कम शक्तिशाली था। चीन का मानना है कि रूस ने तकनीकी जानकारी चोरी होने से बचाने के लिए ऐसा किया।