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रूस के चुनाव परिणाम: सत्तारूढ़ यूनाइटेड रूस को 57.54% से अधिक वोट मिले, क्या पुतिन की पार्टी को स्पष्ट बहुमत?

Mon, 21 Sep 2026 12:34 AM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।

सार

रूस के चुनाव परिणाम आ गए हैं। सत्तारूढ़ दल- यूनाइटेड रूस को 57.54% से अधिक वोट मिले हैं। इन प्रारंभिक नतीजों के आधार पर माना जा रहा है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलेगा। पुतिन लंबे समय से रूस की सत्ता पर काबिज हैं।
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व्लादिमीर पुतिन। (फाइल) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी को एक बार फिर से स्पष्ट बहुमत मिलने के आसार हैं। पुतिन लंबे समय से रूस की सत्ता पर काबिज हैं। इस वर्ष कराए गए चुनाव में भी पार्टी के समर्थकों ने बंपर वोटिंग की है। केंद्रीय चुनाव आयोग की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक पुतिन की पार्टी- यूनाइटेड रूस को 57 प्रतिशत से अधिक वोट मिले हैं। अंतिम आंकड़े आने पर वोट प्रतिशत में बदलाव संभव है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नीतियों का विरोध लगभग नदारद रहा। क्रेमलिन का वर्चस्व मजबूत होने की उम्मीद है। मतदान में धांधली और इलेक्ट्रॉनिक मतदान में समस्याओं की रिपोर्ट्स भी सामने आईं।

चुनाव नतीजों में क्या खास, किस दल का कैसा प्रदर्शन?

रूस के केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने रविवार देर रात (रूसी समय) जारी एक बयान में कहा, चुनाव के शुरुआती परिणाम आ गए हैं। सत्तारूढ़ दल- यूनाइटेड रूस को 57.54% से अधिक वोट मिले हैं। इन प्रारंभिक नतीजों के आधार पर माना जा रहा है कि पुतिन की सत्ता पर पकड़ और मजबूत होगी। खास बात ये भी है कि यूक्रेन के साथ वर्ष 2022 में शुरू हुए सैन्य टकराव के बाद पहली बार आम चुनाव कराए गए हैं।

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रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग ने बताया कि मतदान शुक्रवार को 11 करोड़ 10 लाख पात्र मतदाताओं के लिए शुरू हुआ था। इसमें यूक्रेन के उन चार क्षेत्रों के निवासी भी शामिल थे, जिन्हें मॉस्को ने युद्ध के बाद अवैध रूप से अपने साथ मिलाया था, पर अभी भी उन पर पूर्ण नियंत्रण नहीं है। क्रीमिया के निवासी भी मतदान में शामिल थे, जिसे रूस ने 2014 में अवैध रूप से अपने साथ मिलाया था। कीव और यूरोपीय संघ ने रूसी-नियंत्रित क्षेत्रों में हुए मतदान को अवैध बताया। उन्होंने विदेशी सरकारों से परिणामों को मान्यता न देने का आग्रह किया। रूस और यूक्रेन के रूसी-नियंत्रित क्षेत्रों में मतदान समाप्त होने के बाद भी, पश्चिमी समय क्षेत्रों में दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में मतदान जारी रहा। क्रेमलिन इस संसदीय चुनाव को युद्ध के लिए जन समर्थन दिखाने और अपनी कार्रवाई को वैध बनाने के लिए इस्तेमाल करना चाहता है।

क्रेमलिन की मुख्य पार्टी को भारी बहुमत

  • प्रारंभिक परिणामों से पता चला है कि चार अन्य पार्टियां जो लगभग हमेशा क्रेमलिन के पक्ष में मतदान करती हैं, संसद के निचले सदन- स्टेट ड्यूमा में उनकी वापसी तय है।
  • केंद्रीय चुनाव आयोग के अनुसार लगभग 58% मतदान केंद्रों की गिनती हो चुकी है। 
  • पार्टी सूचियों के आधार पर आवंटित 225 सांसदों में से यूनाइटेड रूस को लगभग 58% वोट मिले हैं।
  • 225 अन्य सांसदों का चुनाव एकल-सीट चुनावों में होगा, यूनाइटेड रूस उनमें भी अधिकांश सीटें जीतने की स्थिति में है।
  • इस चुनाव में अधिकांश विपक्षी दलों को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया, और यह चुनाव सोवियत काल के बाद से रूस में सबसे कठोर राजनीतिक दमन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के उल्लंघन के माहौल में हुआ।

क्रेमलिन ने असंतोष को दबाकर राजनीतिक जोखिमों से बचने की कोशिश की है। एक बड़े राज्य मीडिया अभियान और वास्तविक विपक्ष की अनुपस्थिति में चुनाव पर कड़ा नियंत्रण क्रेमलिन को रूसी राजनीति पर अपनी पकड़ बनाए रखने में मदद करेगा। यह बढ़ती आर्थिक लागतों और यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बीच हो रहा है। मतदाताओं ने दो अलग-अलग मतपत्र डाले, जिससे डूमा की आधी सीटें भरी गईं। बाकी सीटों पर एकल-सीट निर्वाचन क्षेत्रों में व्यक्तिगत उम्मीदवारों को चुना गया। मुख्य क्रेमलिन पार्टी, यूनाइटेड रूस, से निचले सदन, स्टेट डूमा पर अपना भारी नियंत्रण बनाए रखने की उम्मीद है। 'सिस्टेमिक विपक्ष' की छोटी पार्टियां भी अपनी उपस्थिति बनाए रखेंगी।

क्या क्रेमलिन का नियंत्रण मजबूत होगा?

क्रेमलिन इस संसदीय चुनाव को युद्ध के लिए जन समर्थन दिखाने का माध्यम मानता है, जो 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद पहला चुनाव है। यह अपनी कार्रवाई को वैध बनाने का भी प्रयास कर रहा है। उसने किसी भी असंतोष को दबाकर राजनीतिक जोखिमों से बचने की कोशिश की है। एक बड़े राज्य मीडिया अभियान और वास्तविक विपक्ष की अनुपस्थिति में चुनाव पर कड़ा नियंत्रण है। यह क्रेमलिन को रूसी राजनीति पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने में मदद करेगा। यह बढ़ती आर्थिक लागतों और यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बीच हो रहा है। मतदाता डूमा की 450 सीटों के लिए दो अलग-अलग मतपत्र डालते हैं; आधे सीटों के लिए राजनीतिक दल चुने जाते हैं, जबकि बाकी के लिए व्यक्तिगत उम्मीदवार। मुख्य क्रेमलिन पार्टी, यूनाइटेड रूस, से निचले सदन, स्टेट डूमा पर अपना भारी नियंत्रण बनाए रखने की उम्मीद है। 'सिस्टेमिक विपक्ष' की छोटी पार्टियां भी अपनी उपस्थिति बनाए रखेंगी।

विपक्ष को क्यों किनारे किया गया, क्या उल्लंघन हुए?

उदारवादी यबलोको पार्टी, जिसने युद्ध की सार्वजनिक रूप से आलोचना की थी, को रूस के सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने मतपत्र से हटा दिया। उसके केवल कुछ दर्जन उम्मीदवार ही दौड़ में थे। कई युद्ध-विरोधी राजनेताओं को अभियान से पहले जेल में डाल दिया गया या विदेश भागने पर मजबूर किया गया। यबलोको और कम्युनिस्ट पार्टी ने बताया कि उनके कई पर्यवेक्षकों को मतदान केंद्रों से दूर रखा गया। रूस ने ऑर्गेनाइजेशन फॉर सिक्योरिटी एंड कोऑपरेशन इन यूरोप से पर्यवेक्षकों को आमंत्रित नहीं किया, जिस पर रूसी विदेश मंत्रालय ने 'दोहरे मानदंड' का आरोप लगाया। OSCE संसदीय सभा अध्यक्ष पेरे जोन पोंस ने इसे रूस की प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन बताया। यबलोको ने एक पर्यवेक्षक की गिरफ्तारी और बेहोश होने की रिपोर्ट दी, जिस पर 'चुनाव बाधित करने' का आरोप था। पार्टियों ने सीलबंद मतपेटियों के खुलने, मतदान केंद्रों के असुरक्षित दरवाजों और कागजी मतपत्र जारी न करने जैसे उल्लंघनों की सूचना दी। दोनेत्स्क क्षेत्र में एक मतदान केंद्र पर, एक सशस्त्र रूसी सैनिक की निगरानी में मतदाताओं ने मतपत्र डाले।

मॉस्को में इलेक्ट्रॉनिक मतदान में क्या समस्याएं आईं?

रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग की प्रमुख एला पामफिलोवा ने रविवार को बताया कि मॉस्को में इलेक्ट्रॉनिक मतदान प्रणाली को साइबर हमलों का निशाना बनाया गया। उन्होंने इसके लिए 'सिस्टेमिक पार्टियों' में से एक को दोषी ठहराया, पर किसी का नाम नहीं लिया। एक स्वतंत्र रूसी समाचार आउटलेट- सोता विजन, ने रविवार को मॉस्को के मतदान केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक पंजीकरण प्रणाली में तकनीकी खराबी की सूचना दी। आउटलेट ने टेलीग्राम पर बताया कि लोगों को कागजी मतपत्र नहीं दिए गए, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक टर्मिनल से मतदान करने को कहा गया। दिवंगत रूसी विपक्षी नेता एलेक्सी नवालनी के करीबी सहयोगी लियोनिद वोल्कोव ने सुझाव दिया कि कागजी मतपत्र प्रणाली का खराब होना जानबूझकर किया गया हो सकता है। इसका उद्देश्य मतदाताओं को इलेक्ट्रॉनिक मतदान की ओर धकेलना था। उन्होंने रविवार को एक्स पर 'कागजी मतपत्र की मांग करें!' लिखा। कई मतदाताओं ने इलेक्ट्रॉनिक मतदान से इनकार कर दिया, जिससे मतदान केंद्रों के बाहर कतारें लग गईं। यबलोको पार्टी के नेता निकोलाई राइबाकोव ने सेंट पीटर्सबर्ग में एक मतपत्र डाला, जिस पर 'स्वतंत्रता के लिए,' 'शांति के लिए,' और 'यबलोको' लिखा देखा गया।

विदेशों में रूसी विपक्ष ने कैसे विरोध किया?

एलेक्सी नवालनी की विधवा यूलिया नवालनाया सहित रूस के निर्वासित विपक्ष ने युद्ध-विरोधी रूसियों से रविवार दोपहर मतदान करने का आह्वान किया। आर्मेनिया में रहने वाले हजारों रूसियों ने मतदान में भाग लिया। वे राजधानी येरेवन में रूसी दूतावास के बाहर कतार में खड़े थे। उनमें से कुछ 'शांतिपूर्ण रूस के लिए दोपहर' नामक युद्ध-विरोधी प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने युद्ध-विरोधी और पुतिन-विरोधी पोस्टर पकड़े हुए थे। पत्रकार मार्क पोडबेरेज़िन ने कहा कि येरेवन में चुनाव आयोग के सदस्यों ने ऐसी टिप्पणियां कीं जो 'खुले तौर पर डराने-धमकाने' वाली थीं। उन्होंने सुना था कि 'आपको देर-सबेर रूस लौटना होगा, इसे ध्यान में रखें।' लिडिया क्लिमेंको ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि उनके वोट का कोई वास्तविक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सबसे उपयोगी काम 'अन्य लोगों को देखना था जो युद्ध के खिलाफ हैं, एक साझा उद्देश्य में एक साथ होना।' जर्मनी में, मतदाताओं ने बर्लिन में रूसी दूतावास में अपने मतपत्र डाले। असंतुष्ट और ओपन रूस समूह के पूर्व प्रमुख आंद्रेई पिवोवारोव ने इमारत के बाहर एकत्रित विरोध प्रदर्शन को संबोधित किया।

यूक्रेन ने रूस पर 1,000 से अधिक ड्रोन क्यों दागे?

चुनाव का अंतिम दिन यूक्रेनी हमलों की एक बड़ी लहर की पृष्ठभूमि में आया। रूस के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को बताया कि उसकी सेना ने रूस भर में, साथ ही क्रीमिया और काला सागर के ऊपर कुल 1,110 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। मॉस्को क्षेत्र में दो लोग मारे गए और 20 घायल हुए, स्थानीय राज्यपाल आंद्रेई वोरोब्योव ने बताया। यह चुनाव यूक्रेन के तेल रिफाइनरियों पर लंबी दूरी के ड्रोन हमलों की गर्मियों के बाद हुआ है। उन हमलों ने व्यापक ईंधन संकट पैदा कर दिया था। ऑनलाइन खुदरा विक्रेता वाइल्डबेरीज और ओजोन से संबंधित गोदामों पर भी हमला किया गया था। इन हमलों ने रूस की आर्थिक समस्याओं को बढ़ा दिया है। इसने लाखों लोगों के लिए युद्ध को उनके घरों तक पहुंचा दिया है।

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