यूक्रेन पर हमले के बाद रूस पर लगाई गई अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों का असर दिखने लगा है। 100 साल में पहली बार रूस अपना विदेशी कर्ज तय समय पर नहीं चुका पाया और डिफॉल्टर यानी चूककर्ता बन गया। हालांकि, रूस के वित्त मंत्री एंटन सिलुआनोव ने कहा है कि हमारे पास पैसा है, लेकिन कृत्रिम संकट के कारण यह स्थिति बनी है।
रूस को विदेशी कर्ज के ब्याज के रूप में 26 जून को 10 करोड़ डॉलर का भुगतान करना था, लेकिन वह यह चुकाने में विफल रहा। इसके साथ ही वह 1913 के बाद पहली बार डिफॉल्टर बन गया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार रूस की विदेशी कर्ज चुकाने की समयसीमा रविवार को समाप्त हो गई। उसे ब्याज बतौर 10 करोड़ डॉलर चुकाना थे। इसके साथ ही उसे दी गई एक माह की मोहलत भी खत्म हो गई।
पैसा है पर पाबंदियों के चलते भुगतान नहीं कर पा रहे
रूस का कहना है कि उसके पास विदेशी कर्ज चुकाने के लिए पर्याप्त पैसा है, लेकिन पश्चिमी देशों द्वारा उस पर लगाई गई पाबंदियों के कारण वह अंतरराष्ट्रीय कर्जदाताओं को पैसा नहीं चुका पा रहा है। वित्त मंत्री सिलुआनोव ने गत माह कहा था कि हमारे पास पैसा है और हम कर्ज चुकाने को तैयार हैं, लेकिन कृत्रिम संकट के हालात पैदा कर दिए गए हैं। इससे रूस के लोगों के जीवन स्तर पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
40 अरब डॉलर चुकाना हैं रूस को
रूस को लगभग 40 अरब डॉलर के विदेशी बॉन्ड का भुगतान करना है। इसमें से आधा विदेशी कर्ज है। यूक्रेन जंग के कारण लगी पाबंदियों के कारण रूस की ज्यादातर विदेशी मुद्रा और स्वर्ण भंडार विदेशों में जब्त है। इससे पहले रूस 1913 में बोल्शेविक क्रांति के दौरान डिफॉल्टर बना था। उस समय रूस के जार साम्राज्य का पतन हो गया था और सोवियत संघ बना था।